Diwali in 2020 - दिवाली कैसे मानते है और उसके पीछे की कहानी

Diwali in 2020 – दिवाली कैसे मनाते है और उसके पीछे की कहानी

फेस्टिवल

दिवाली पर्व (Diwali Festival) का नामकरण, संस्कृत के “दीपावली” (Dipawali) शब्द से हुआ है, जिसका अर्थ होता है “रोशनी की पंक्ति”। इस दिन मिट्टी के दीयों से रोशनी करके वैभव और समृद्धि की देवी लक्ष्मी जी को घर पधारने  का न्योता दिया जाता है।  प्राचीन मान्यता के  अनुसार  इस  दिन लक्ष्मी जी उस  घर  में सुख – समृद्धि बरसाती हैं, जहाँ साफ़ -सफाई व सुंदरता झलकती है। दिवाली का पर्व हिंदू Lunisolar Calender के अनुसार हर वर्ष कार्तिक महीने के ग्रीष्मकालीन फसल (Summer harvest ) की कटाई के पश्चात मनाया जाता है। दिवाली के दिन घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है। साथ ही पूरे घर को दीपों से सजाकर मां लक्ष्मी के आगमन का स्वागत किया जाता आइये दीवाली के बारे में विस्तार से जानते हैं

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दिवाली क्या है What is Diwali

Diwali जिसे हम अंग्रेजी में Festival of Light भी कहते हैं वह हिंदुओं का मुख्य त्योहारों में से एक है, जो की 5 दिनों का त्यौहर होता है। यह पांच दिन, हिंदू पंचांग के अश्विन मास के कृष्ण पक्ष के तेहरवे  दिन से लेकर , कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन तक रहते हैं। यह समय ,जॉर्जियन कैलेंडर (Georgian Calender) के अनुसार अक्टूबर (October) नवंबर (November) में पड़ता है।  दिवाली का त्यौहार, अंधेरे पर रोशनी की, बुराई पर अच्छाई  की और अज्ञानता पर ज्ञान की जीत का पर्व है ।  यह पर्व  ऐश्वर्या और समृद्धि की देवी लक्ष्मी (Lakshmi) की पूजा अर्चना से जुड़ा हुआ है। भगवान गणेश (Bhagvan  Ganesha) और माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi)  की पूजा के बाद खील और बतासे का प्रसाद बांटकर एक दूसरे को दिवाली की शुभकामनाएं दी जाती हैं। भारत के कुछ क्षेत्रों में, यह पर्व रावण (Ravana)  को हराकर भगवान राम (Bhagvan Ram) के अयोध्या आगमन के उपलक्ष में भी मनाया जाता है।

दिवाली का इतिहास – History of Diwali

इतिहास में दिवाली (Diwali) पर्व के फसल काटने पर मनाए जाने वाले उत्सव से जुड़े होने का साक्ष्य संस्कृत लेख – पदम पुराण (Padma Purana) और स्कंद पुराण (Skanda Purana)  से मिलता है ।  Seventh century में राजा हर्ष ने संस्कृत नाटक “नागनंदा” में “दीपाप्रतिपदोत्सव ” शब्द द्वारा दीपावली (Dipawali) का उल्लेख किया है। राजशेखर ने  9th century में “काव्यमीमांसा” में दीवाली का “दीपामल्लिका “के रूप में किया है । पर्शियन यात्री अलबरूनी (Alberuni) ने 11th century में अपनी भारत यात्रा वृतांत में लिखा था कि “हिंदू कार्तिक मास में अमावस्या के दिन दीपावली मनाते हैं ” । 16th century में पुर्तगाली यात्री डोमिनो पाईस ने अपनी हिंदू राज्य विजयनगर की यात्रा वृतांत में लिखा है कि “अक्टूबर मास में दीपावली पर लोग दीयों से घर और मंदिरों को सजाते हैं “। प्राचीनकाल में विभिन्न स्थानों पर दीपोत्सव और दीपावली  लिखे हुए पत्थर और  लोहे के टुकड़े मिले थे । 10th century  में कृष्ण  के राष्ट्रकूट  राज्य की ताम्बे की थाली पर दीपोत्सव खुदा हुआ था । 12th century में कर्नाटक के धारवाड़ के ईश्वर मंदिर में संस्कृत कन्नड़ सिंध भाषा में खुदा “पवित्र अवसर” के रूप में दीपावली का साक्ष्य मिलता है ।

दीपावली से जुड़ी कहानियाँ – Diwali Story

हमारे देश में मनायें जाने वाले हर त्योहार के साथ कोई ना कोई कहानी जुड़ी होती है ऐसे ही Dipawali से जुड़ी हुई दो प्रचलित कहानियां इस प्रकार हैं –

  1. कार्तिक मास की अमावस्या को भगवान राम राक्षसराज रावण को हराकर 14 वर्ष के वनवास के बाद अपनी अयोध्या नगरी लौटे थे । अयोध्या की प्रजा ने अपने प्रिय राजा राम के घर लौटने के उपलक्ष में अपने अपने घरों को दीयों से सजाया था । इसी उपलक्ष में वहां पर दिवाली मनाई जाने लगी ।
  2. दूसरी कथा के अनुसार असुर नरकासुर ने देवता इंद्र की माता के कानों के कुंडल चुराए थे तथा 16000 महिलाओं को कैद कर रखा था|  नरकासुर के दुष्कर्मों से भयभीत होकर  सभी देवता और महर्षि , विष्णु जी के पास पहुंचे | तब विष्णु जी ने भगवान कृष्ण के रूप में अवतार लेकर कार्तिक की चतुर्दशी को नरकासुर से इंद्र देवता की माता के कुंडल वापस लिए और सभी महिलाओं को उनकी कैद से छुड़ाया था।  इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाने लगा। लोगों ने भगवान कृष्ण की इस जीत के उपलक्ष में अगले दिन दीए जलाकर अपना आभार प्रकट किया और उसके बाद यह दिन Diwali के रूप में मनाया जाने लगा ।
  3. तीसरी कथा के अनुसार दिवाली के एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनाते हैं क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने इस दिन नरकासुर का वध किया था। नरकासुर एक पापी राजा था, यह अपने शक्ति के बल से देवताओं पर अत्याचार करता था और अधर्म करता था। उसने सोलह हजार कन्याओं को बंदी बनाकर रखा था। इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया। बुराई पर सत्य की जीत पर लोगों ने अगले दिन उल्लास के साथ दीपक जलाकर दीपावली का त्यौहार मनाया। 

पांच दिनों का त्योहार  दिवाली

Diwali का festival पांच  दिन तक मनाया जाता है। जानिए 5 Days of Diwali का त्यौहार संक्षेप में।

Dhanteras

इस वर्ष धनतेरस या धन्वंतरि त्रयोदशी, 12 नवंबर को पड़ रही है ।  इस दिन मुख्य रूप से धन के देवता कुबेर , गणेश जी तथा  लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है । ज्यादातर लोग इस दिन सोना या किसी अन्य धातु का बर्तन अवश्य खरीदते हैं।

Narakh Chaturdashi ((Choti Diwali))

दूसरे दिन छोटी दिवाली (Choti Diwali) मनाई जाती है , जो इस वर्ष 13 नवंबर को पड़ रही है ।  इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था । दक्षिण भारत में दिवाली अथवा दीपावली (Diwali or Dipawali) का मुख्य पर्व इसी दिन मनाया जाता है । 

Badi Diwali

उत्तर भारत में  मुख्य त्योहार बड़ी दिवाली (Badi Diwali), तीसरे दिन मनाई जाती है, जो इस वर्ष 14 नवंबर को पड़ रही है ।  इस दिन सब लोग अपने घर व आसपास के स्थान को दीयों से रोशनी करके दियो से रोशनी करके सजाते हैं । लक्ष्मी जी की पूजा का इस दिन विशेष महत्व होता है । इस दिन हिंदुओं का नया वर्ष शुरू होता है ।

Govardhan Puja

चौथे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है ,जो इस साल 15 नवंबर को पड़ रही है । इस दिन व्यवसायी जन , नए वर्ष के लिए नया बहीखाता खोलते हैं।

Bhai Dooj

Diwali के उत्सव का पांचवा और आखिरी दिन भाई दूज या भैया दूज का होता है, जो कि इस साल 14 नवंबर को पड़ रहा है।  दिवाली के आखिरी दिन भाई और बहन के प्रेम के नवीकरण का दिन है जिसमे बहनें अपने भाई के माथे पर पवित्र लाल तिलक लगाती हैं और उनकी लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहनों को आशीर्वाद और प्यार का तोहफा देते हैं।

दिवाली क्यों मनाया जाता है – Why is Diwali celebrated

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम द्वारा रावण (दशहरा) को मारने और सीता को लंका में कैद से छुड़ाने के 20 दिन बाद Diwali या Dipawali मनाई गई थी। यह उत्सव 14 साल वनवास के बाद भगवान राम के अयोध्या लौटने का प्रतीक है। भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के स्वागत के लिए पूरा अयोध्या नगरी को सजाया गया था। लोगों ने अपने राजा का स्वागत करने के लिए पूरी नगरी को मिट्टी के दीयों से सजाया। तब से दिवाली के दिन मिट्टी के दीयों से सजावट की जाती है और इस त्योहार को मनाया जाता है।

Diwali Puja Vidhi

स्वच्छता के बगल में ईश्वर को माना जाता है, Firecrackers से दिवाली मनाने वाले लोगों से बेहतर इस बात को कोई नहीं समझ सकता है। इस उत्सव की तैयारी घर में साफ़-सफाई से शुरू होती है और घरों के अलावा दफ्तरों और दुकानों तक को सजाया जाता है। आइये जानते हैं हम दिवाली के पांचों दिनों को कैसे मनाते हैं… 

दिवाली मनाने का तरीकाHow to Celebrate Diwali

  • धनतेरस  दीवाली के उत्सव का पहला दिन होता है। त्योहार से दो दिन पहले धनतेरस (Dhanteras) के दिन भगवान धनवंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है। इस दिन लोग सोने या चाँदी की कोई वस्तु ख़रीदते हैं।  जो लोग सोने या चाँदी की चीज़ खरीदने में सक्षम नहीं हैं वह अपने गृहस्थ जीवन से जुडी कोई भी नयी वास्तु लाते हैं।
  • धनतेरस के बाद का दिन छोटी दीवाली या नरक चतुर्दशी होती है। इस दिन को नरकासुर नाम के राक्षस का वध करने की ख़ुशी में पटाखे छोड़े जाते हैं।
  • दिवाली के दिन मिठाई, पकवान आदि तैयार किये जाते हैं और एक-दूसरे में बांटे भी जाते हैं । दिवाली की रात भाग्य और समृद्धि की कामना के साथ मां लक्ष्मी का साथ हमेशा बना रहे इसके लिए उनकी पूजा की जाती है और मुख्य द्वार पर रंगोली बनाने के साथ- साथ पूरे घर को दिये से सजाया जाता है ।
  • दीवाली के बाद बलिप्रतिपदा या पड़वा या गोवर्धन पूजा या वर्षप्रतिपदा का दिन होता है।  इस दिन गोवर्धन पूजा की जाती है।
  • उसके बाद भाई दूज के दिन  भाई के  माथे पर पवित्र लाल तिलक लगाती हैं और उनकी लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं।  

दीवाली का महत्व – Diwali Festival Importance

पुराणों के अनुसार, त्रेतायुग (Tretayug) में जब भगवान श्री राम रावण का वध कर वापस अयोध्या लौट थे तब वहां के लगों ने उनका स्वागत दीप जलाकर किया था। इसी स्वागत को हर वर्ष लोग दिवाली के त्योहार के रूप में मनाते हैं। दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इससे व्यक्ति के घर में धन की कोई कमी नहीं रहती है। इसके कई अलग अलग महत्व हैं जैसे –

दिवाली का ऐतिहासिक महत्व – Historical Significance

Punjab में जन्मे स्वामी रामतीर्थ (Swami Ramathirtha) का जन्म व महाप्रयाण दोनों दीपावली के दिन ही हुआ। इन्होंने Dipawwali के दिन गंगातट पर स्नान करते समय ‘ओम’ कहते हुए समाधि ले ली। महर्षि दयानन्द ने भारतीय संस्कृति के महान जननायक बनकर दीपावली के दिन अजमेर के निकट अवसान लिया। इन्होंने आर्य समाज की स्थापना की। दीन-ए-इलाही (Din-e-elahi) के प्रवर्तक मुगल सम्राट अकबर (Mughal Emperor Akbar) के शासनकाल में दौलतखाने (Daulat khana) के सामने 40 गज ऊँचे बाँस पर एक बड़ा आकाशदीप दीपावली के दिन लटकाया जाता था। बादशाह जहाँगीर भी दीपावली धूमधाम से मनाते थे। मुगल वंश के अंतिम सम्राट बहादुर शाह जफर (Bahadur Shah Zafar) दीपावली (Dipawali) को त्योहार के रूप में मनाते थे और इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में वे भाग लेते थे। शाह आलम द्वितीय (Shah Alam II) के समय में समूचे शाही महल (Palace) को दीपों से सजाया जाता था एवं लालकिले में आयोजित कार्यक्रमों में हिन्दू-मुसलमान दोनों भाग लेते थे।

दिवाली का आर्थिक महत्व – Economical Significance

दीवाली का त्यौहार भारत में एक प्रमुख खरीदारी की अवधि का प्रतीक है। उपभोक्ता खरीद और आर्थिक गतिविधियों (Economic activities) के संदर्भ में दीवाली, पश्चिम में क्रिसमस (Christmas) के बराबर है। यह पर्व नए कपड़े, घर के सामान, उपहार, सोने और अन्य बड़ी ख़रीददारी का समय होता है। इस त्योहार पर खर्च और ख़रीद को शुभ माना जाता है क्योंकि लक्ष्मी को, धन, समृद्धि, और निवेश की देवी माना जाता है। मिठाई, ‘कैंडी और आतिशबाजी की ख़रीद भी इस दौरान अपने चरम सीमा पर रहती है। प्रत्येक वर्ष दीवाली के दौरान 5 हज़ार करोड़ रुपए के पटाखों आदि की खपत होती है।

अलग- अलग धर्मों में दिवाली का महत्व

दीवाली का हिन्दू धर्म के अलावा अन्य धर्मों में भी महत्व है जैसे 

जैन धर्म

जैन मतावलंबियों के अनुसार चौबीसवें तीर्थंकर, महावीर स्वामी (Mahavir Swami) को इस दिन मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।  इसी दिन उनके प्रथम शिष्य, गौतम गणधर (Gautam gandha) को ज्ञान प्राप्त हुआ था। जैन समाज में   दीपावली, महावीर स्वामी (Mahavir Swami) के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है।  अतः अन्य सम्प्रदायों से जैन दीपावली की पूजन विधि पूर्णतः भिन्न है।

सिख धर्म

सिक्खों के लिए भी दीवाली महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन ही अमृतसर में 1577 में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास (Foundation stone) हुआ और इसके अलावा 1619 में दीवाली के दिन सिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी (Hargobind Singh) को जेल से रिहा किया गया था।

दूसरे देशों में दिवाली का महत्त्व

दीपावली को विशेष रूप से हिंदू, जैन और सिख समुदाय के साथ विशेष रूप से दुनिया भर में मनाया जाता जो की, श्रीलंका (Sri Lanka), पाकिस्तान (Pakistan), म्यांमार (Myanmar), थाईलैंड (Thailand), मलेशिया (Malaysia), सिंगापुर (Singapore), इंडोनेशिया (Indonesia), ऑस्ट्रेलिया (Australia), न्यूजीलैंड (New Zealand), फिजी (Fiji), मॉरीशस (Mauritius), केन्या (Kenya), तंजानिया (Tanzania), दक्षिण अफ्रीका (South Africa), गुयाना (Guyana), सूरीनाम (Suriname), त्रिनिदाद (Trinidad) और टोबैगो (Tobago), नीदरलैंड (Netherland), कनाडा (Canada), यूनाइटेड अरब अमीरात (United Arab Emirates)  यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom)  और यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका (United States of America) है। भारतीय संस्कृति की समझ और भारतीय मूल के लोगों के वैश्विक प्रवास के कारण दीवाली मनाने वाले देशों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। कुछ देशों में यह भारतीय प्रवासियों द्वारा मुख्य रूप से मनाया जाता है, अन्य दूसरे स्थानों में यह सामान्य स्थानीय संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है। इन देशों में अधिकांशतः दीवाली को कुछ मामूली बदलाव के साथ इस लेख में वर्णित रूप में उसी तर्ज पर मनाया जाता है पर कुछ महत्वपूर्ण विविधताएँ उल्लेख के लायक हैं।

Diwali in 2020 : कब है दिवाली     

इस साल, दिवाली 14 नवंबर, 2020 (शनिवार) को पड़ेगी। जैसा की हम जानते हैं की भारत में त्यौहार के आने के कुछ दिन पहले से ही जोरों शोरों से होने लगती है। लेकिन इस बार कोरोना की वजह से बहुत सारी  समस्याएं आयी और सारे त्योहारों का रंग फीका हो गया। लेकिन समय के साथ सभी ने कोरोना का सामना करना सीख लिया  है।  इस बार सारे  त्यौहार बहुत सारी सावधानियों को ध्यान में रखते हुए मनाया जायेगा। सरकार ने जनसुरक्षा को देखते हुए कई guidelines भी दी हैं। इस बार अयोध्या में  खास दीवाली मनाई जाएगी। क्योंकि कोर्ट के फैसले के बाद राम जन्मभूमि पर निर्माण कार्य शुरू किया गया है।  इसका सीधा प्रसारण आप टीवी पर देख सकते हैं।

दिवाली पूजा का समय

दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। कई लोग इस शुभ दिन पर धन की देवी से प्रार्थना करने के लिए उपवास भी रखते हैं।

पूजा मुहूर्त

Day and DateTime
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (14 नवंबर 2020) – 
शनिवार
आरम्भ05:28 बजे   
समाप्त07:24 बजे 
प्रदोष काल (14 नवंबर 2020) – 
शनिवार
आरम्भ05:28 से प्रातः 
समाप्तप्रातः 08:07 तक   
वृषभ काल (14 नवंबर 2020) – 
शनिवार
आरम्भशाम 05:28 
समाप्तप्रातः 07:24 तक    
अमावस्या तिथि (14 नवंबर 2020)
शनिवार
आरम्भ  02:17 दोपहर
समाप्त10:36 शाम 
दिवाली पूजा मुहूर्त

अन्य शहरों में Lakshmi Puja मुहूर्त

CityTime
पुणेशाम 05:58 से शाम 07:59 
चेन्नई    शाम 05:41 से शाम 07:43 
जयपुर    शाम 05:37 से शाम 07:33 
हैदराबाद    शाम 05:42 से शाम 07:42 
गुड़गांवशाम 05:29 से शाम 07:25 
चंडीगढ़  शाम 05:26 से शाम 07:21 
कोलकाताशाम 04:54 से शाम 06:52 
जयपुर शाम 05:37 से शाम 07:33 
मुंबई  शाम 06:01 से शाम 08:01  
बेंगलुरुशाम 05:52 से शाम 07:54 
अहमदाबादशाम 05:57 से शाम 07:55  
नोएडाशाम 05:28 से शाम 07:23 
Lakshmi Puja Muhurta in other cities

अगले पांच सालों के लिए दिवाली की तारीख पता करें

2021गुरूवार, 4 नवंबर
2022सोमवार, 24 अक्टूबर
2023रविवार, 12 नवंबर
2024शुक्रवार, 1 नवंबर
2025मंगलवार, 21 अक्टूबर

सारांश

दीवाली (Diwali) मनाने की कई वजह और तरीके होते हैं पर यह त्योहार विजय का त्योहार है। यह हमें  जीवन में फैले अंधकार को दूर करने और आगे बढ़ने की सीख देता है। उम्मीद करते हैं कि यह त्योहार आप लोगों के जीवन में भी ख़ुशियाँ और समृद्धि लेकर आएगा। हम प्रार्थना करते हैं कि यह त्यौहार आपके जीवन में फैले सारे अंधकार दूर करे और आप सभी को दीवाली की बहुत बहुत  शुभकामनाए।

हमारे द्वारा दी गई जानकारी में अगर आपको कुछ अधूरा लगा हो तो हमें कमेंट कर जरूर बताएं। आगे की अपनी पोस्ट में हम उस कमी को दूर करने की पूरी कोशिश करेंगे।

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