Fitness - फ़िटनेस के बारे में जानकारी

Fitness Meaning in Hindi – फ़िटनेस के बारे में जानकारी

फिटनेस

मानव जीवन कुदरत का अनमोल उपहार है और मानव जीवन के लिए अच्छा स्वास्थ्य (Fitness)। जैसे हर अनमोल वस्तु की सही देखरेख और सुरक्षा अनिवार्य होती है वैसे ही स्वास्थ्य को सहेजना भी नितांत आवश्यक है। Fitness इस खज़ाने की चाबी कही जा सकती है।

फ़िटनेस क्या है – What is Fitness

फ़िटनेस (Fitness) से एक ऐसा शब्द है जो हम रोज़ाना कई बार सुनते हैं और इसे सुनते ही हमारे दिमाग़ में एक सुगठित (Compact) और शक्तिशाली (Powerful) व्यक्तित्व की छवि उभर कर आती है। लेकिन क्या इन्हीं parameters पर किसी व्यक्ति को fit या unfit कहा जा सकता है? आइए समझने की कोशिश करते हैं।

आमतौर पर physically fit होने को ही हम फ़िटनेस (Fitness) समझते हैं जबकि फ़िटनेस का दायरा इससे कहीं ज़्यादा है। फ़िटनेस body, mind और emotion का एक स्वस्थ संतुलन (healthy balance) है।

फ़िटनेस के प्रकार – Different Types of Fitness

फ़िटनेस को मुख्यतः physical fitness, mental fitness, emotional fitness और spiritual Fitness में वर्गीकृत किया जा सकता है…

Physical Fitness

यह हमारे health और daily activities से जुड़ी है। इसमें flexibility of joints, cardiovascular fitness, muscular strength and endurance शामिल हैं। केवल लंबाई और उम्र के हिसाब से वज़न का सही होना ही काफी नहीं माना जा सकता। हो सकता है एक जैसे काम करते हुए बाहरी तौर पर स्वस्थ लगने वाला व्यक्ति अपने मुकाबले कमज़ोर लगने वाले व्यक्ति की तुलना में जल्दी थकान महसूस करने लगे। एक perfect physique को physical fitness का पैमाना नहीं कहा जा सकता है।

Mental Fitness

अगर हमारा शरीर एक machine है तो दिमाग़ उसका processor है। मेंटल फ़िटनेस (Mental Fitness) का मतलब है कि हमारा दिमाग़ कितनी अच्छी तरह से किसी information को समझकर process कर सकता है। मेंटल फ़िटनेस हमारे विचारों और प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करती है। इसमें किसी दिमागी बीमारी का न होना, understanding, concentration, memory और reasoning भी शामिल हैं। सिर्फ एक बेहतर IQ वाले व्यक्ति को ही mentally fit नहीं कहा जा सकता।

Emotional Fitness

यह हमारी भावनाओं के प्रति हमारी समझ और उनको उचित तरीके से व्यक्त करने का कौशल है। प्रेम (love), क्रोध (anger), दु:ख (sadness), दया (mercy), खुशी (joy) जैसी भावनाओं से हर कोई परिचित होता है पर इनको व्यक्त करने के तरीके सबके अलग होते हैं। कोई क्रोध आने पर मौन धारण कर लेता है कोई चीखता-चिल्लाता है और कोई तोड़फोड़ करने लगता है। प्रेम में कोई सृजन करता है तो कोई विध्वंसधैर्य (patience) emotional fitness का एक अहम aspect है।

Spiritual Fitness

इसकी कोई निश्चित परिभाषा तो नहीं है पर यह मुख्यत: जीवन के उद्देश्य को समझने, अपने आसपास के वातावरण (environment) से सामंजस्य बिठाने और नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए जीवन निर्वाह से जुड़ी है। हालांकि आम तौर पर इसे आध्यात्म (Spirituality) से जोड़कर ही देखा जाता है। ब्रम्हांड (Universe) को बनाने और चलाने वाली परम शक्ति पर विशवास करना, उससे जुड़ने की कोशिश करना, positivity बनाए रखना यह सब इसमें शामिल हैं।

Fitness का इतिहास – पुराने दौर में फ़िटनेस

10000 BC के पहले जब तक मानव भोजन के लिए शिकार पर निर्भर था तब तक भोजन की तलाश में मीलों घूमने और शिकार करने में ही काफ़ी फिजिकल एक्टिविटी (physical activity) हो जाती थी।

10000-8000 BC के बीच जब मनुष्यों ने खेती (farming) करना सीखा तब उनकी life पहले की तुलना में थोड़ी आसान हो गई क्योंकि भोजन ढूंढने की ज़रूरत नहीं रही फिर भी फिजिकल एक्टिविटीज़ (physical activities) से नाता बना रहा।

धीरे-धीरे जब साम्राज्य विकसित हुए, सेना और सैनिकों की ज़रूरत पढ़ने लगी तब फ़िटनेस को लेकर एक अलग तरह का revolution हुआ जिसको सबसे अच्छी तरह से ईरान और ग्रीस में देखा गया जहाँ पर 6-7 साल की उम्र से ही लड़कों को भविष्य के सैनिकों के रूप में तैयार करने के लिए शिकार, दौड़, भाला फेंक, घुड़सवारी जैसे अभ्यास कराए जाते थे।

आपको हर प्राचीन महान योद्धा की तस्वीर या मूर्ति बिलकुल shapely body वाले व्यक्ति की ही मिलेगी ही न कि किसी obese व्यक्ति की।

अब यह बात समझ में आने लगी थी कि फिजिकल फ़िटनेस और स्वास्थ्य का आपस में गहरा नाता है। तो यह न केवल सैनिकों बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जरूरी है। इस तरह wrestling, boxing, kalaripayattu, kung-fu जैसे martial arts प्रचलित होने लगे जिनमें से कुछ फिजिकल फ़िटनेस के साथ-साथ मन की एकाग्रता, भावनाओं पर नियंत्रण और मस्तिष्क के विकास पर भी ध्यान देते थे।

भारत में लोगों का main focus स्पिरिचुअल वेल बीइंग (spiritual well being) और धार्मिक अभ्यासों में था तो यहाँ पर योग (yoga) का कॉनसेप्ट विकसित हुआ जो spiritual growth और फ़िजिकल फ़िटनेस दोनों को target करता है। योग एक प्राचीन साधना है जिसका  उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है।

मध्य युग (900-1500 AD) के दौरान साम्राज्यों के उत्थान और पतन की घटनाएँ तेज़ी से घटीं और इस वजह से physical fitness भी लोगों में बनी रही चाहे इसकी वजह जागरूकता न होकर परिस्थितिजन्य circumstantial रही हो।

16th और 17th century आते-आते शिक्षा, चिकित्सा क्षेत्र और विज्ञान एक नई बुलंदी की ओर अग्रसर होने लगे। Physical education को बढ़ावा दिया जाने लगा। European countries में gymnastics बहुत प्रचलित होने लगा। इनसे अमरीका और बाकी देश भी अछूते न रहे। हालाँकि इसके बाद हुई Industrial Revolution ने मानवीय श्रम को मशीनों से बदल दिया और इसकी वजह से लोगों की लाइफ़स्टाइल बहुत प्रभावित हुई। Lifestyle disorders भी बढ़ने लगे। तब कुछ संस्थाओं ने जागरूकता का बीड़ा उठाया। American Health Association, Presidents Council On Youth Fitness इन्हीं में से थीं।

भारत के संदर्भ में देखें तो भारतीय लोगों का फ़िटनेस से पुराना नाता रहा है। पुराने ज़माने में लोग सूर्योदय से पहले उठ जाते थे। अपना सारा काम ख़ुद करते थे। yoga, meditation, simple food सबकी दिनचर्या में शामिल थे। जीवन सामान्यत: तनाव रहित था। कृषि प्रधान देश (Agricultural Prime Country) होने की वजह से खेतों में काम करना और कई तरह के संबंधित श्रम लोगों को fit रखते थे और फ़िटनेस के लिए अलग से प्रयास करने की ज़रूरत नहीं हुआ करती थी। बदलते वक़्त के साथ modern lifestyle हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन गई और फ़िट रहने की ज़रूरत भी बहुत ज़्यादा हो गई।

आधुनिक दौर में फ़िटनेस – Modern Age Fitness

आज ख़ुद को फ़िट रखने के तरीक़ों में एक्सरसाइज (exercise), जिम (gym), योग (yoga), मेडिटेशन (meditation), संतुलित आहार (balanced diet) और नियमित दिनचर्या (regular routine) ये सारी चीज़ें शामिल हैं। अब लोगों में फ़िट रहने के प्रति उत्साह और craze या कहें कि जागरुकता बढ़ती चली जा रही है। इसका प्रमाण आपको अपने आस-पास के पार्कों में सुबह और शाम बढ़ती हुई भीड़ को देखकर मिल सकता है। फ़िटनेस गुरू (fitness guru) और फ़िटनेस फ्रीक (fitness freek) जैसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा बन चुके हैं। लोग अब walk या exercise करने के दौरान ख़ास तरह के जूते, कपड़े, wristbands, activity monitor का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। पार्कों के किनारे खड़े होकर गेहूं (Wheat), ज्वार (Fever), लौकी (Pumpkin) और करेले (Bitter gourd) के जूस इत्यादि पीते हुए और इनके हेल्थ बेनिफिट (health benefit) बताते हुए बहुत लोग नज़र आ जाएंगे जिनकी संख्या कुछ साल पहले तक बहुत कम थी। पार्कों में योगा सिखाने वाले लोगों की भरमार है।Laughter club हैं। आपमें से कई उनका हिस्सा भी होंगे। कई कंपनियाँ भी अपने कर्मचारियों का नियमित health check up कराती हैं। आज टीवी पर दिखने वाला हर दूसरा-तीसरा विज्ञापन किसी न किसी health product या fitness product का होता है।

फ़िटनेस इंडस्ट्री – About the Fitness Industry

Fitness Industry आज बहुत बड़ी हो चुकी है जिसका सालाना turn over 2.5 Billion dollor से अधिक है। साल 2024 तक इसके 6 Billion dollor तक होने का अनुमान है। Fitness Industry में कई तरह के health food, exercise machines, food supplements, multi vitamins, books, clothes और accessories जैसे shoes, wristband शामिल हैं। यह इंडस्ट्री रोज़गार के नए अवसर दे रही है। अब fitness के बजाए wellness शब्द पर focus किया जा रहा है जिसमें पोषण (Nutrition), मानसिक स्वास्थ्य (mental health) और आत्मिक शांति (spiritual peace) पर भी ध्यान दिया जाता है।

फ़िटनेस का महत्व – Importance of Fitness

इस टॉपिक पर बात करना बिलकुल वैसा ही है जैसा नानी से ननिहाल की बात करना। संक्षेप में कहा जाए तो  फ़िटनेस; immunity, weight control, stamina, mental power, अनेक lifestyle disorders से बचाव, quality of life, happiness, positivity का एक बेहतरीन package है। अगर हम अपने आप को सबसे अच्छी कोई gift दे सकते हैं तो वह फिटनेस ही है।

फ़िटनेस in 2020

2020 में जिस चीज़ ने सारी दुनिया को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया गया है वह Corona है और इसने ये सिखाया है कि strong immunity कितनी ज़रूरी है और फ़िटनेस सबसे ज़्यादा असर हमारी immunity पर ही डालती है। Corona में lockdown के समय जब लोग घर से बाहर नहीं निकल पा रहे थे तो उनके पास एक अच्छा विकल्प था अपने आपको fit रखने के लिए तरह-तरह की exercise करके वक़्त बिताना और ये उस वक्त की ज़रूरत भी थी। ये कहना exaggerate करना नहीं होगा कि 2020 में फ़िटनेस के प्रति हर किसी का रुझान बढ़ा है और फ़िटनेस सिर्फ़ एक ख़ास age group या किसी gender तक ही सीमित नहीं बल्कि आज फ़िटनेस हर उम्र वर्ग के बच्चे (children), बूढ़े (older), स्त्री (woman), पुरुष (man) सबकी एक बहुत बड़ी ज़रूरत बन चुकी है।

सारांश

हर किसी के लिए फ़िटनेस के मायने अलग हो सकते हैं पर फ़िट रहना सबके लिए ज़रूरी है। फ़िटनेस जितनी defence services, players और actors की ज़रूरत है उतनी ही एक गृहणी या उम्रदराज़ रिटायर्ड बुज़ुर्ग की। फ़िट रहना अपनी ज़िंदगी को लंबा, स्वस्थ और अच्छे तरीक़े से जीने का एक मंत्र है। उम्मीद है इस article ने आप लोगों में फ़िटनेस को लेकर कुछ और जागरूकता बढ़ायी होगी। कहीं कोई कमी लगती हो या कोई सुझाव हो तो हमें लिखें हम बेहतरी के लिए तत्पर हैं। फ़िट रहिए, स्वस्थ रहिए, ख़ुश रहिए।

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