Govardhan Puja - गोवर्धन पूजा कब कैसे और क्यों मनाया जाता है

Govardhan Puja in Hindi – गोवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है और इसका इतिहास

फेस्टिवल

दीपावली की अगले दिन गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja)  की जाती है। लोग इसे अन्नकूट (Annakut) के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में काफी महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दिखाई देता है।  Govardhan Pooja प्रकृति को समर्पित पर्व है जिसका आरंभ श्रीकृष्ण ने किया था। वैष्णव समुदाय (Vaishnavas) और श्रीकृष्ण के उपासकों के लिए यह अति महत्वपूर्ण त्योहार है। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोककथा है।

गोवर्धन पूजा में गोवर्धन पर्वत (Govardhan Parvat) की पूजा की जाती है। साथ ही गायों की पूजा की जाती है शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती है जैसे नदियों में गंगा। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। इनका बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है। इस तरह गौ सम्पूर्ण मानव जाती के लिए पूजनीय और आदरणीय है। गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है और इसके प्रतीक के रूप में गाय की। यह त्योहार इस बात को सिद्ध करता है कि अगर हम अपने आराध्य पर पूर्ण विश्वास करते हैं तो वह हमेशा हर विपत्ति से हमें उबारते हैं।

गोवर्धन पूजा कब होता है – When is Govardhan Puja

Govardhan Puja कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (first lunar day of bright fortnight) के दिन की जाती है।  यह दीपावली का अगला दिन होता है। विक्रम संवत् कैलेंडर (Vikram Samvat Calender) का यह प्रथम दिन होता है। गुजरात (Gujrat) में इस दिन से नए साल की शुरूआत होती है। इस पूजा में अन्नकूट (Annakut) का प्रसाद बनाकर श्रीकृष्ण एवं गोवर्धन पर्वत को भोग (offering food to deity) लगाया जाता है। ब्रज (Braj), गोकुल (Gokul) और वृन्दावन (Vrindavan) से शुरू होकर यह त्योहार पूरे भारत में प्रचलित हुआ। अब विश्वभर में कृष्ण भगवान को मानने वाले इसे बड़े उत्साह से मनाते हैं।  गोवर्धन पूजा में घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ जी की अल्पना बनाकर उनका पूजन करते है। तत्पश्चात ब्रज के साक्षात देवता माने जाने वाले गिरिराज भगवान (पर्वत) को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।

Govardhan Puja StoryGovardhan Puja Katha

गोवर्धन पूजा का प्रचलन आज से नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण के द्वापर युग (Dwapara Yuga) से चला आ रहा है।  मान्यता है कि Govardhan Puja संबंध भगवान कृष्ण से है और इसकी शुरुआत भी द्वापर युग में ही हो गई थी। लेकिन इससे पहले ब्रजवासी इंद्र देव  की पूजा करते थे। तभी भगवान ने ये बताया कि आप लोग इंद्र की पूजा करते है इससे कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है। इसलिए आपको गौ धन को समर्पित गोवर्धन पर्वत पर जाकर गोवर्धन पूजा करनी चाहिए।

भगवान कृष्ण की बात मानकर लोगों ने इंद्र देव के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए जाने लगे तभी इस बात से क्रोधित होकर इंद्र देव ने भारी वर्षा की और लोगो को डराने का प्रयास किया। इंद्र देव ने भारी वर्षा  करके पूरे ब्रजवासियों को जलमग्न कर दिया और लोग प्राण बचाने के लिए भगवान से प्रार्थना करने लगे। कृष्ण ने देखा तो वो इंद्र देव की मूर्खता पर मुस्कुराए और ब्रजवासियों को बचाने के लिए पूरा गोवर्धन पर्वत अपनी एक उंगली पर उठा लिया।

भारी वर्षा का प्रकोप लगातार 7 दिन तक चलता रहा और भगवान कृष्ण ब्रजवासियों को उसी गोवर्धन पर्वत  को  छाता समान बनाकर उन्हें बचाते रहे। गोवर्धन पर्वत  के कारण  ब्रजवासियों पर एक जल की बूँद भी नही पड़ी। इन्द्र को कुछ समय बाद पता चला कि पृथ्वी पर भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में जन्म लिया है तो यह  बात जानकर इंद्र देव (Indra) बहुत पछताए और भगवान से क्षमा मांगी।

इस बात के समाप्त  होने के बाद भगवान कृष्ण (Bhagavan   Krishna)  ने सातवें दिन गोवर्धन पर्वत को नीचे रखकर ब्रजवासियो से कहा कि अब से प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा का पर्व उल्लास के साथ मनायिये  । तब से लेकर आज तक गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja)  का पर्वहर घर में मनाया जाता है।

पूजा विधि – Govardhan Puja Vidhi

Govardhan Puja Vidhi
Govardhan Puja Vidhi

आईये जानते है कैसे करें Govardhan Puja.

  • सुबह उठ कर शरीर पर तेल मलकर स्नान करें।
  • इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाएं।
  • अब गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं और आस पास ग्वाल बाव, पेड़ पौधों की आकृति बनाएं।
  • इसके बीच में भगवान श्री कृष्म की मूर्ति को रख दें।
  • इसके बाद भगवन कृष्ण, ग्वाल-बाल और गोवर्धन पर्वत का पूजन करें।
  • पूजा के बाद पकवान और पंचामृत का भोग लगाएं।
  • गोवर्धन की कथा सुनें, प्रसाद वितरण करें और फिर सपरिवार भोजन करें।

 

गोवर्धन पूजा क्यों मनाते हैं – Why is Govardhan Puja Celebrated

भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर संपूर्ण गोकुल वासियों की इंद्र के कोप से रक्षा की थी। इंद्र के अभिमान को चूर करने के  बाद भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करें। गोवर्धन पर्वत स से गोकुल वासियों को पशुओं के लिए चारा मिलता है और यही पर्वत यहां बादलों को रोककर वर्षा करवाता है,जिससे कृषि उन्नत होती है। इसलिए गोवर्धन की पूजा की जाती है। इसके अलावा आज के दिन गाय की पूजा करने का भी विधान है।

गोवर्धन पूजा करने से घर में समृद्धि आती है और कभी भी अन्न की कमी नहीं होती है। यह पर्वत श्रीकृष्ण के काल की एक ऐसी निशानी है जो आज भी अपने वास्तविक स्वरूप में मौजूद है। गर्ग संहिता (Garg Samhita) में लिखा है कि यह पर्वत भगवान को काफी प्रिय है और इसकी परिक्रमा तीर्थयात्रा की तरह पुण्य फल देती है। इसलिए इस पर्वत को भगवान कृष्ण का स्वरूप भी माना जाता है।

गोवर्धन पूजा का महत्व – Significance of Govardhan Puja

कृष्ण का जीवन संदेशपरक है। अपनी लीलाओं के माध्यम से वह हमें बहुत कुछ सिखाते हैं। वर्षा के देव होने की वजह से वर्षा करना इंद्र देव का कर्तव्य था लेकिन उन्हें इस बात का अहंकार हो गया था। अपनी पूजा न होते देख क्रोधवश प्रतिक्रिया देना और भी अनुचित था। कृष्ण द्वारा उनके अहंकार का मर्दन किया गया। यह पूरा घटनाक्रम हमें बिना किसी स्वार्थ कर्तव्य पालन की शिक्षा देता है।

गोवर्धन पूजा  में प्रकृति के महत्व को दिखाया गया है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दिखाई देता है। प्रकृति  सम्पूर्ण मानव जाती के लिए पूजनीय और आदरणीय है। 

अन्नकूट क्या होता है – Annakut Puja

 

Govardhan Puja ISKON

Annakut Puja Govardhan Puja का एक भाग होता है।   गोवर्धन पूजा में गोवर्धन पर्वत और भगवान  कृष्ण को चढ़ाये जाने वाले प्रसाद को अन्नकूट कहा जाता है। यह अलग अलग जगहों अलग अलग मनाया जाता है। ज्यादा तर ग्वाले अन्नकूट को ही मनाते हैं। अन्नकूट की शुरूआत भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से हुई।  अन्नकूट शब्द का अर्थ होता है ‘अन्न का समूह’  अलग अलग प्रकार के अन्न को समर्पित और वितरित करने के कारण ही इस पर्व का नाम अन्नकूट पड़ा है। अन्नकूट को दीया (छोटे तेल के दीपक) और रंगीन चावल, रंगीन रेत और / या फूलों की पंखुड़ियों से जमीन पर रंगोली बनाकर  मनाया जाता है। इस दिन  कई तरह के पकवानों और मिठाइयों का भगवान को भोग चढ़ाया जाता है, इसमें मौसमी फल, मिष्ठान्न, मावा, दूध, मिली-जुली सब्जियाँ, पूरी, दाल, चावल शामिल हैं। उदाहरण के लिए, 2009 में भारत के मैसूर के इस्कॉन मंदिर में भगवान कृष्ण को 250 Kg भोजन चढ़ाया गया था।   यद्यपि अन्नकूट सबसे अधिक बार भगवान कृष्ण के साथ जुड़ा हुआ है ।  मुंबई, भारत के श्री महालक्ष्मी मंदिर में, माताजी को 56 भोग  और खाद्य सामग्री भेंट की जाती है और फिर इसे 500 से अधिक भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। अन्नकूट त्यौहार के दिन  लगभग 3,850 BAPS मंदिरों और केंद्रों में एक दिन के  उत्सव के  रूप  में मनाया जाता है।

 

गोवर्धन पूजा in 2020 – Govardhan Puja Kab Hai

ब्रजवासी मानते हैं कि गिरिराज गोवर्धन उन्हें कष्टों से बचाते हैं इसलिए Corona से बचने के लिए ब्रज और आसपास के क्षेत्रों में ज्येष्ठ माह (Jyeshtha-third month of Hindu calender) में भी गोवर्धन पूजा की गई। जैसे द्वापर युग में कठिन समय आने पर भक्तों ने श्रीकृष्ण पर पूर्ण आस्था दिखाई थी उसी तरह इस आपदा में भी भक्तों ने उनको पुकारा। गोवर्धन पूजा में अब कुछ ही दिन शेष हैं। मंदिरों और घरों में तैयारियाँ होने लगी हैं। बाज़ार सज गये हैं। पूजन सामग्री की दुकानों पर भीड़ जुट रही है। लोगों का उत्साह देखते ही बनता है।

गोवर्द्धन पूजा, तिथि और शुभ मुहूर्त

  • गोवर्द्धन पूजा / अन्‍नकूट की तिथि: 15 नवंबर 2020
  • प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 15 नवंबर 2020 को सुबह 10 बजकर 36 मिनट से
  • प्रतिपदा तिथि समाप्‍त: 16 नवंबर 2020 को सुबह 07 बजकर 06 मिनट तक
  • गोवर्द्धन पूजा सांयकाल मुहूर्त: 15 नवंबर 2020 को दोपहर 03 बजकर 19 मिनट से शाम 05 बजकर 27 मिनट तक

सारांश

Govardhan Puja से प्रकृति प्रेम का भी संदेश मिलता है यह गोवर्धन पूजा   बताता है  कि अगर हम प्रकृति की रक्षा करते हैं तो वह जीवन को बचाने के लिए भी अपना सबकुछ अर्पित कर देती है।

मुझे आशा है कि आपको मेरा यह लेख “Govardhan Puja – गोवर्धन पूजा कब कैसे और क्यों मनाया जाता है” पसंद आया होगा और आपको यह उपयोगी लगा होगा। हमारे द्वारा दी गई जानकारी में अगर आपको कुछ अधूरा लगा हो तो हमें कमेंट कर जरूर बताएं। आगे की अपनी पोस्ट में हम उस कमी को दूर करने की पूरी कोशिश करेंगे।

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