Hindi Diwas - हिन्दी दिवस क्या और क्यों मनाया जाता है

Hindi Diwas – हिन्दी दिवस क्या और क्यों मनाया जाता है

इवेंटस

Hindi Diwas: हिंदी, दुनिया में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। चीनी के बाद हिंदी, दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। अगर हिंदी भाषा के इतिहास की बात करें तो यह भाषा लगभग एक हज़ार साल पुरानी मानी जाती है।  यह अपने आप में पूर्ण रूप से समर्थ और सक्षम भाषा है।  इसके बावजूद हिंदी के प्रति लोग बहुत कम जागरुक हैं। यह हमारे देश की राजभाषा है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजभाषा को लेकर आज भी लोगों का नजरिया बहुत ही संकीर्ण है। उन्हें न तो इसके इतिहास के बारे में पता है न ही इसके महत्व के बारे में। सैकड़ों सालों में देश में तमाम विदेशियों ने आकर राज किया है जिनमें तुर्क, मंगोल, अफगान, मुगल, फ्रांसीसी, पुर्तगीज और मुख्य तौर पर अंग्रेज थे। इन शासकों ने अपनी भाषा में दरबार चलाया और शासन किया। हिंदी ने सभी भाषाओं की अच्छाईयों को अपनाते हुए स्वंय को और भी शक्तिशाली और खूबसूरत बना लिया। हिंदी भाषा शासकीय भाषाओं से प्रभावित हुई और उसका शब्द भंडार जो संस्कृत के प्रभाव से पहले ही अत्यधिक समृद्ध था वह और भी संपन्न होता गया। सबसे बड़ी बात यह कि हिंदी भाषा जैसे लिखी जाती है, वैसे बोली भी जाती है। दूसरी भाषाओं में कई अक्षर साइलेंट होते हैं और उनके उच्चारण भी लोग अलग-अलग करते हैं, लेकिन हिंदी के साथ ऐसा नहीं होता। इसलिए हिंदी को बहुत सरल भाषा कहा जाता है। हिंदी को कोई भी बहुत आसानी से सीख सकता है। आजादी प्राप्त करने के बाद हमने हिंदी भाषा के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए हिन्दी दिवस मनाने की शुरुआत की। हिन्दी दिवस को मनाने का उद्देश्य हिंदी के प्रति जागरुकता और जन जन के मध्य इसे मजबूत करना है।

हिन्दी दिवस क्या है – What is Hindi Diwas

देश में हिंदी भाषा के महत्व को बताने और जनमानस तक इसके प्रसार के लिए हिन्दी दिवसमनाया जाता है। इस दिन स्कूलों में हिंदी प्रतियोगिताएं की जाती हैं। बच्चों को हिंदी भाषा में महत्वपूर्ण प्रस्तुती देने का मौका दिया जाता है। यहां तक कि सरकारी विभागों में भी हमेशा से इसे महत्व दिया जाता है। इसके साथ ही हिंदी प्रोत्साहन सप्ताह का आयोजन किया जाता है।

हिन्दी दिवस कब मनाया जाता है

14 सितंबर, 1949 के दिन हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिला था। तब से हर साल 14 सितंबर को पूरे देश में हिन्दी दिवस मनाया जाता है।

हिन्दी दिवस क्यों मनाया जाता है

हिंदी भारत में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा है और इसे राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया था। हिंदी के महत्व को बताने और इसके प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर 1953 से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को Hindi Diwas के तौर पर मनाया जाता है।

हिन्दी दिवस का इतिहास – Hindi Diwas History

1918 में हिन्दी साहित्य सम्मेलन में भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए पहल की थी। गांधी जी ने हिंदी को जनमानस की भाषा भी बताया था। साल 1947 में जब अंग्रेजी हुकूमत से भारत आजाद हुआ तो उसके सामने भाषा को लेकर सबसे बड़ा सवाल था। क्योंकि भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं। 6 दिसंबर 1946 में आजाद भारत का संविधान तैयार करने के लिए संविधान सभा का गठन हुआ। संविधान सभा ने अपना 26 नवंबर 1949 को संविधान के अंतिम प्रारूप को मंजूरी दे दी। आजाद भारत का अपना संविधान 26 जनवरी 1950 से पूरे देश में लागू हुआ।  संविधान सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हिन्दी को अंग्रजी के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था। इस पर साल 1949 में स्वतन्त्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितंबर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जिसे भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343(1) में बताया गया है कि राष्ट्र की राज भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। क्योंकि यह निर्णय 14 सितंबर को लिया गया था। इसी वजह से इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में घोषित कर दिया गया।

विवाद

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। अंग्रेजी भाषा को हटाए जाने की खबर पर देश के कुछ हिस्सों में विरोध प्रर्दशन शुरू हो गया था। तमिलनाडू में जनवरी 1965 में भाषा विवाद को लेकर दंगे हुए थे। फलस्वरुप अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा।

हिन्दी दिवस का महत्त्व – Importance of Hindi Diwas

Hindi Diwas एक माध्यम है यह संदेश है कि भारत की मातृभाषा हिंदी है। Hindi Diwas अपने साथ एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आता है कि दूसरी भाषाओं को सीखना बिल्कुल भी गलत नहीं है लेकिन दूसरी भाषाओं को सीखने के दौरान अपनी मातृभाषा को अनदेखा करना भी सही नहीं है। दुनिया की उन्नत भाषाओं में हिंदी भाषा सबसे अधिक व्यवस्थित भाषा है। सरल शब्दों में कहें तो हिंदी में हम जो लिखते हैं वही बोलते हैं और उसका अर्थ भी वही होता है। लेकिन अन्य भाषाओं में ऐसा कम ही देखने को मिलता है। संविधान सभा में 13 सितंबर, 1949 को पं. नेहरू ने तीन प्रमुख बातें कही थीं, पहली बात, ‘किसी विदेशी भाषा से कोई राष्ट्र महान नहीं हो सकता।’ दूसरी बात, ‘कोई भी विदेशी भाषा आम लोगों की भाषा नहीं हो सकती’ और तीसरी बात, ‘भारत के हित में, भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के हित में, ऐसा राष्ट्र बनाने के हित में जो अपनी आत्मा को पहचाने, जिसे आत्मविश्वास हो, जो संसार के साथ सहयोग कर सके, हमें हिंदी को अपनाना ही होगा।’

वर्तमान समय में हिंदी की स्थिति

विडंबना यह है कि विश्व में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के बावजूद हिंदी भाषा अपने ही घर में उपेक्षित जिंदगी जी रही है। जहां गुड मॉर्निग से सूर्योदय और गुड इवनिंग से सूर्यास्त होता है। अंग्रेजी बोलने वालों को तेज तर्रार बुद्धिमान और हिंदी बोलने वालों को अनपढ़ गवार जताने की परम्परा रही है। अक्सर हिंदी राजनीती का भी शिकार होती है। जब भी हिन्दी दिवस आता है हिंदी को लेकर लम्बे लम्बे भाषण देकर विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन कर स्वंय की पीठ थपथपा ली जाती है। हिंदी हमारी दोहरी नीति का शिकार हो चुकी है। यही कारण है कि हिंदी आज तक व्यावहारिक दृष्टि से न तो राजभाषा बन पाई और ने ही राष्ट्र भाषा

अंग्रेजी बाजार में पिछड़ रही है हिन्दी

भारत में वैसे तो जमीनी स्तर पर हिंदी की पकड़ अभी व्याप्त है। लेकिन जैसे ही बाजार की तरफ मुड़ते हैं वहां लगातार हिंदी को नजरअंदाज करने की कोशिश की गई है। इसका बड़े स्तर पर उपयोग कंपनियों, नौकरशाही द्वारा किया जाता है। अंग्रेजी का उपयोग लिखित रूप से अधिक होता है हालांकि बोले जाने वाले स्तर पर अंग्रेजी कम प्रचलित है। आंकड़ों पर ध्यान दें तो भारत में  करीब 10 प्रतिशत लोग ही बोलचाल में अंग्रेजी का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि बाजार में इसका वर्चस्व है। छोटी से छोटी कंपनियां भी अपनी कार्यप्रणाली में अंग्रेजी का ही इस्तेमाल करती हैं। हालांकि बदलते दौर में कई ऐसे बदलाव देखने को मिलते हैं जो हिंदी के उज्जवल भविष्य के लिए काफी सकारात्मक है।

Hindi Diwas 2020

इस साल मनाई जाने वाले Hindi Diwas के बारे में बात करें तो इस तरफ कुछ सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर इंटरनेट पर लगातार हिंदी सामग्री की मांग बढ़ रही है। इसकी पुष्टि स्वंय गूगल ने की है। गांव गांव तक अपने सेवाएं पहुंचाने के लिए विभिन्न कंपनियां भी हिंदी का सहारा ले रही हैं। राजनेताओं द्वारा संसद, विधानसभा से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक में हिंदी बोली जा रही है। हिंदी से जुड़े चैनल्स, फिल्में, वेब सीरीज की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इस वजह से आने वाले समय हिंदी का महत्व और भी बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।  हिंदी भविष्य में विश्व-भाषा बनने के पथ पर अग्रसर है। विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के कई प्रमुख लोग भी कहते हैं भविष्य में हिंदी सीखे बिना काम नहीं चलेगा। पूर्व राष्ट्रपति बरॉक ओबामा ने तो कई अवसरों पर अमेरिकी नागरिको को हिंदी सीखने की सलाह दी थी। वह यह सलाह अकारण ही नहीं थी। भारत उभरती हुई विश्व-शक्ति के रूप में पूरे विश्व में जाना जा रहा है।

प्रसिद्ध लोगों के हिंदी पर विचार/कोट्स

  • निज भाषा उन्नति अहै, सब भाषा को मूल, बिनु निज भाषा ज्ञान के, मिटै न हिय को शूल— भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  • ‘हिंदी का प्रश्न स्वराज्य का प्रश्न है’ – महात्मा गांधी
  • हिंदी भारतीय संस्कृति की आत्मा है- कमलापति त्रिपाठी
  • हिंदी हृदय की भाषा हैं, जिसकी वजह से हमारे शब्द हृदय से निकलते हैं और हृदय तक पहुँचते हैं– अज्ञात
  • हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा है और यदि मुझसे भारत के लिए एकमात्र भाषा का नाम लेने की कहा जाए तो वह निश्चित रूप से हिन्दी ही है– कामराज
  • हिन्दी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्रोत है– सुमित्रानंदन पंत
  • जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य के गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता – डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
  • हिंदी भारतीय संस्कृति की आत्मा है- कमलापति त्रिपाठी
  • जो सम्मान, संस्कृति और अपनापन हिंदी बोलने से आता हैं, वह अंग्रेजी में दूर-दूर तक दिखाई नहीं देता हैं – अज्ञात
  • हिंदी का प्रचार और विकास कोई रोक नहीं सकता- पंडित गोविंद बल्लभ पंत
  • हिन्दी पढ़ना और पढ़ाना हमारा कर्तव्य है. उसे हम सबको अपनाना है– लालबहादुर शास्त्री
  • परदेशी वस्तु और परदेशी भाषा का भरोसा मत रखो अपने में अपनी भाषा में उन्नति करो– भारतेंदु हरिश्चन्द्र
  • हिन्दी देश की एकता की कड़ी है – डॉ. जाकिर हुसैन
  • हिन्दी के द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है – महर्षि स्वामी दयानन्द
  • हिंदी है हम और हिंदी हमारी पहचान हैं– अज्ञात
  • हिन्दी सरलता, बोधगम्यता और शैली की दृष्टि से विश्व की भाषाओं में महानतम स्थान रखती है– डॉ. अमरनाथ झा
  • देश के सबसे बड़े भूभाग में बोली जानेवाली हिन्दी राष्ट्रभाषा – पद की अधिकारिणी है – सुभाषचन्द्र बोस
  • हिन्दी की एक निश्चित धारा है, निश्चित संस्कार है– जैनेन्द्रकुमार
  • हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा तो है ही, यही जनतंत्रात्मक भारत में राजभाषा भी होगी- राजगोपालाचारी
  • हमारी नागरी लिपी दुनिया की सबसे वैज्ञानिक लिपी है-राहुल सांकृत्यायन
  • देश की किसी संपर्क भाषा की आवश्यकता होती है और वह (भारत में) केवल हिन्दी ही हो सकती है-– श्रीमती इंदिरा गांधी
  • जिस देश को अपनी भाषा और साहित्य का गौरव का अनुभव नहीं है, वह उन्नत नहीं हो सकता – डॉ. राजेंद्र प्रसाद
  • हिन्दी एक जानदार भाषा है; वह जितनी बढ़ेगी देश को उतना ही लाभ होगा – जवाहरलाल नेहरू
  • सभी भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपी आवश्यक है तो वो देवनागरी ही हो सकती है – जस्टिस कृष्णस्वामी अय्यर
  • हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्त्रोता है- सुमित्रानंदन पंत
  • ‘यद्यपि मैं उन लोगों में से हूँ, जो चाहते हैं और जिनका विचार है कि हिंदी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है’ – लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक
  • हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाना भाषा का प्रश्न नहीं अपितु देशाभिमान का प्रश्न है – एन. निजलिंगप्पा
  • हिन्दी उन सभी गुणों से अलंकृत है, जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषा की अगली श्रेणी में समासीन हो सकती है– मैथिलीशरण गुप्त
  • राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की उन्नति के लिए आवश्यक है- महात्मा गांधी
  • जब तक इस देश का राजकाज अपनी भाषा (हिन्दी) में नहीं चलता तब तक हम यह नहीं कह सकते कि इस देश में स्वराज्य है– मोरारजी देसाई
  • हिंदी आम बोलचाल की ‘महाभाषा’ है- जॉर्ज ग्रियर्सन
  • राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है– महात्मा गांधी
  • प्रान्तीय ईर्ष्या–द्वेष को दूर करने में जितनी सहायता इस हिंदी प्रचार से मिलेगी, उतनी दूसरी किसी चीज़ से नहीं मिल सकती- सुभाषचंद्र बोस
  • मैं दुनिया की सभी भाषाओं की इज्जत करता हूं पर मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं सह नहीं सकता – आचार्य विनोबा भावे
  • हिंदी किसी एक प्रदेश की भाषा नहीं बल्कि देश में सर्वत्र बोली जाने वाली भाषा है – विलियम केरी
  • मेरा आग्रहपूर्वक कथन है कि अपनी सारी मानसिक शक्ति हिन्दी भाषा के अध्ययन में लगावें. हम यही समझे कि हमारे प्रथम धर्मों में से एक धर्म यह भी है– विनोबा भावे
  • हिंदी मेरी माँ ने मुझे सिखाया हैं, इसलिए इसके प्रति प्रेम और सम्मान मेरे हृदय में अन्य भाषाओँ की अपेक्षा अधिक हैं – अज्ञात

 सारांश

हिंदी सिर्फ हमारी भाषा ही नहीं बल्कि यह हमारी पहचान भी है। हमारा यह कर्तव्य बनता है कि हम हिंदी को आगे बढ़ाएं और उन्नति की राह पर ले जाएं। तो आइए इस हिन्दी दिवस पर हम हिंदी बोलने, हिंदी सीखने और हिंदी सिखाने का प्रण लेते हैं। साथ ही स्वंय से यह वादा भी करते हैं कि केवल एक ही दिन नहीं हमें हर दिन हिन्दी दिवस मनाना है।  आशा करते हैं कि हिन्दी दिवस हमारे द्वारा उपलब्ध कराई गई सभी जानकारी आपको पंसद आई होगी और आप इसे अपने स्कूल, कॉलेज और दफ्तर पर पढ़कर हिंदी भाषा के महत्व से दूसरों को भी अवगत करा पाएंगे।

हमारे द्वारा दी गई जानकारी में अगर आपको कुछ अधूरा लगा हो तो हमें कमेंट कर जरूर बताएं। आगे की अपनी पोस्ट में हम उस कमी को दूर करने की पूरी कोशिश करेंगे। 

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