जवाहर लाल नेहरू की जीवनी – Jawaharlal Nehru Biography in Hindi

Jawaharlal Nehru Biography in Hindi – जवाहर लाल नेहरू की जीवनी

जीवनी

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की जीवनी (Jawaharlal Nehru Biography in Hindi) के बारे में तो सभी ने सुना ही होग। लेकिन अक्सर हम समय की कमी के चलते पूरी जीवनी को नहीं पढ़ पाते हैं। इस वजह से हम आपके लिए Jawaharlal Nehru की जीवनी से जुड़ी कई मुख्य दिलचस्प बातों को आसान भाषा में आपको बताने जा रहे हैं। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू  को आजाद भारत के आधार की स्थापना करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने न सिर्फ देश को अपने पैरों पर खड़ा किया बल्कि ऐसे काम किए जो आज भी देश के विकास में मदद पहुंचा रहे हैं। वह एक स्वतंत्रता सेनानी के साथ ही अंतराष्ट्रीय पटल पर आजाद भारत की आवाज पहुंचाने वाले पहले प्रधानमंत्री भी बने। प्रधानमंत्री के तौर पर Pandit Jawaharlal Nehru का कार्यकाल आज भी चर्चा के केन्द्र में रहता है। उनकी निजी जिंदगी से लेकर राजनीतिक सफर आज के नेताओं के लिए एक सीख है। पेशे से तो पंडित नेहरू एक वकील थे लेकिन दुनिया में असल पहचान तो उन्हें India’s First Prime Minister के तौर पर मिली।

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जवाहर लाल नेहरू की जानकारी एक नज़र में

पूरा नामपंडित जवाहर लाल नेहरू
धर्महिन्दू
जन्म14 नवंबर 1889, इलाहबादउत्तरपश्चिमी प्रान्तब्रिटिश भारत,(अब उत्तर प्रदेश अथवा प्रयागराजभारत)
मृत्यु27 मई 1964, नई दिल्लीभारत
मातास्वरूप रानी नेहरू
पितामोतीलाल नेहरू
जीवनसाथीकमला नेहरू (1916)
बच्चेइंदिरा प्रियदर्शिनी
शैक्षिक –ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज
पेशा –बैरिस्टर
लेखक
राजनीतिज्ञ
उपलब्धियाँ/ सम्मानभारत रत्न (1955)
राजनीतिक दलभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
संबंधनेहरूगाँधी परिवार
राजनितिक पदभारत के प्रथम प्रधानमन्त्री (15 अगस्त 1947 – 27 मई 1964)
राष्ट्रपतिराजेन्द्र प्रसाद
सर्वपल्ली राधाकृष्णन
गर्वनर जनरलअर्ल माउंटबेटन
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (26 जनवरी 1950 तक)
सहायकवल्लभभाई पटेल
उत्तरा धिकारीगुलज़ारीलाल नन्दा
जवाहर लाल नेहरू की जानकारी एक नज़र में

जन्म और शुरुआती जीवन – Jawaharlal Nehru Birth Date And Place

भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru का birthday 14 नवंबर को 1889 में उत्‍तर प्रदेश के इलाहाबाद में एक कश्‍मीरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता Motilal Nehru जाने-माने वकील थे और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के नेता थे। उनकी मां का नाम  Swaroop Rani था। मोतीलाल नेहरू के चार बच्‍चे थे जिनमें जवाहर लाल नेहरू सबसे बड़े थे।

शि‍क्षा – Jawaharlal Nehru Education

जवाहरलाल नेहरू को दुनिया के बेहतरीन स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त थी। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई हैरो और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से पूरी की थी। उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज यूनिवर्सिट से पूरी की। हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ाई कर 1912 में नेहरू जी ने बार एट लॉ की उपाधि हासिल की जिसके बाद वे बार में बुलाए गए।

नेहरू का आजादी में योगदान – Nehru’s Contribution to Indian Independence

Jawaharlal Nehru स्वदेश लौटने के बाद स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल हुए। इस दौरान उनकी  Mahatma Gandhi से करीबी बढ़ी और 1912 में वे कांग्रेस से जुड़े। 1920 और 1930 के दौरान अंग्रेजों ने नेहरू जी को कई बार जेल में डाला। 1920 के प्रतापगढ़ के पहले किसान मोर्चे को संगठित करने का श्रेय उन्हीं को जाता है। सितंबर 1923 में वह All India Congress Committee के जनरल सेक्रेटरी बने। साल 1928 में उन्हें  Congress President के रूप में चुना गया। इस बीच स्वतंत्रता संघर्ष चलता रहा। 1928 में लखनऊ में Simon Commission के विरोध में नेहरू घायल हुए और 1930 के नमक आंदोलन में गिरफ्तार हुए। उन्होंने 6 माह जेल काटी। 1935 में अलमोड़ा जेल में ‘आत्मकथा‘ लिखी। जेल से छूटने के बाद वह अपनी बीमार पत्‍नी को देखने स्विट्जरलैंड गए। उन्होंने कुल 9 बार जेल यात्राएं कीं। 1926 में नेहरू ने इटली, स्विट्जरलैंड, इंग्‍लैंड, बेल्जियम, जर्मनी और रूस का दौरा किया। उन्होंने विश्वभ्रमण किया और अंतरराष्ट्रीय नायक के रूप में पहचाने गए।

इंदिरा प्रियदर्शिनी का जन्म – Birth Of Indira Priyadarshini

1917 में भारत लौटने के चार वर्ष बाद मार्च 1916 में नेहरू का विवाह  Kamla Kaul के साथ हुआ। कमला दिल्ली में बसे कश्मीरी परिवार की थीं। दोनों की अकेली संतान Indira Priyadarshini का जन्म 1917 में हुआ। 1917 में जवाहर लाल नेहरू, Home Rule League में शामिल हो गए। राजनीति में उनका असल प्रवेश दो साल बाद 1919 में हुआ जब वे Mahatma Gandhi के संपर्क में आए। उस समय महात्मा गांधी ने Rowlatt Act के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था। नेहरू, महात्मा गांधी के सक्रिय लेकिन शांतिपूर्ण, Civil Disobedience Movement के प्रति काफी आकर्षित हुए। नेहरू ने विदेशी वस्तुओं का त्याग करके खादी को अपना लिया और 1920-1922 के Non-Cooperation Movement में सक्रिय रूप से कूद पड़े और इस दौरान वो गिरफ्तार किए गए।

प्रधानमंत्री के तौर पर नेहरू – Jawaharlal Nehru As A Prime Minister

साल 1947 में भारत को आजादी मिलने पर जब पहले प्रधानमंत्री के लिए कांग्रेस में मतदान हुआ तो Sardar Vallabhbhai Patel और Acharya Kripalani  को सर्वाधिक मत मिले थे। लेकिन Mahatma Gandhi के कहने पर दोनों ने अपना नाम वापस ले लिया और जवाहरलाल नेहरू को प्रधानमंत्री बनाया गया। पंडित जवाहरलाल नेहरू 1947 में स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। आजादी के पहले गठित अंतरिम सरकार में और आजादी के बाद 1947 में भारत के प्रधानमंत्री बने और 27 मई 1964 को उनके निधन तक इस पद पर बने रहे।

बच्चों के चहेते चाचा नेहरू – Nehru as Chacha Nehru

जवाहर लाल नेहरू आधुनिक भारत के निर्माता थे। सिर्फ स्वतंत्रता की लड़ाई में ही नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन में भी उनका बड़ा योगदान था। उन्हें बच्चे प्यार से ‘चाचा नेहरू’ कहकर पुकारते थे, क्योंकि वे बच्चों के बहुत प्यारे थे। कहा जाता है कि गुलाब और बच्चे उनके दिल के बहुत करीब थे। वह बच्चों के विकास के लिए बेहद चिंतित रहते थे क्योंकि उन्हें विश्वास था कि बच्चे देश के भविष्य हैं। इसलिए बच्चों का अच्छी तरह से पोषण और शिक्षित होना समाज को मजबूत बनाता है। बाल दिवस‘ ‘चाचा नेहरू’ को श्रद्धांजलि और बच्चों पर उनके विचारों और देश की प्रगति में उनके योगदान के लिए एक श्रद्धांजलि है। उनके अनुसार, ‘मैं बच्चों को बहुत प्यार करता हूं। उनके साथ खेलने की कोशिश करता हूं, इससे मैं अपने आपको उनको जैसा ही महसूस करता हूँ।’

पाकिस्तान-चीन से रिश्ते में नेहरू का योगदान

नेहरू, पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंधों में सुधार नहीं कर पाए। उन्होंने चीन की तरफ मित्रता का हाथ भी बढ़ाया, लेकिन 1962 में चीन ने धोखे से आक्रमण कर दिया। चीन का आक्रमण जवाहरलाल नेहरू के लिए एक बड़ा झटका था और शायद इसी वजह से उनकी मौत भी हुई।

प्रधानमंत्री बनने के बाद नेहरू ने किए ये बड़े काम – Jawaharlal Nehru Work

प्रधानमंत्री बनने के बाद जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक मूल्यों और विचारों की बात की। उन्‍होंने Secular और Liberal Approach पर जोर दिया। उन्‍होंने भारत की बुनियादी एकता पर फोकस किया। उन्होंने लोकतांत्रिक समाजवाद की वकालत की और 1951 में पहली पंचवर्षीय योजनाओं को लागू करके भारत के industrialization को प्रोत्साहित किया। नेहरू ने उच्च शिक्षा की स्थापना करके वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा दिया। उन्‍होंने कई सामाजिक सुधारों की स्थापना की जैसे मुफ्त सार्वजनिक शिक्षा, भारतीय बच्‍चों को मुफ्त खाना, महिलाओं के लिए कानूनी अधिकार, जाति के आधार पर भेदभाव को रोकने के लिए कानून आदि।

नेहरू, महात्मा गांधी के काफी प्रिय थे – Nehru And Mahtma Gandhi Relation

नेहरू महात्मा गांधी के काफी प्रिय थे। उन्हीं के कहने पर उन्हें देश का प्रथम पीएम बनाया गया था। धर्मनिरपेक्षता और भारत की जातीय तथा धार्मिक विभिन्नताओं के बावजूद देश की मौलिक एकता पर जोर देने के अलावा नेहरू भारत को वैज्ञानिक खोजों और तकनीकी विकास के आधुनिक युग में ले जाने के प्रति भी सचेत थे।

भारत रत्न से सम्मानित किया गया

नेहरू, Korean War का अंत करने, स्वेज नहर विवाद सुलझाने और congo agreement को मूर्तरूप देने जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में मध्यस्थ की भूमिका में रहे। West Berlin, Austria और Laos के जैसे कई अन्य विस्फोटक मुद्दों के समाधान में पर्दे के पीछे रह कर भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्हें वर्ष 1955 में Bharat Ratna से सम्मानित किया गया। अपने देशवासियों में निर्धनों तथा अछूतों के प्रति सामाजिक चेतना की जरूरत के प्रति जागरुकता पैदा करने और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान पैदा करने का भी कार्य उन्होंने किया। उन्हें अपनी एक उपलब्धि पर विशेष गर्व था कि उन्होंने प्राचीन Hindu Civil Code में सुधार कर अंतत: उत्तराधिकार तथा संपत्ति के मामले में विधवाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार प्रदान करवाया।

महान लेखक – Jawahar Lal Nehru as Writer

समस्त राजनीतिक विवादों से दूर नेहरू एक बेहतरीन लेखक थे। राजनीतिक क्षेत्र में लोकमान्य तिलक के बाद जम कर लिखने वाले नेताओं में वे अलग से पहचाने जाते हैं। नेहरू जी ने महान ग्रंथों का अध्ययन किया था। सभी राजनैतिक उत्तेजनाओं के बावजूद वे स्वाध्याय के लिए रोज ही समय निकाल लिया करते थे। नेहरू ने अपनी अधिकतर पुस्तकें जेल में ही लिखी। भारत की खोज (Discovery Of India) ने लोकप्रियता के अलग प्रतिमान रचे हैं, जिस पर आधारित भारत एक खोज नाम से एक उत्तम धारावाहिक का निर्माण भी हुआ है। नेहरू की जीवनी An Autobiography के बारे में सुप्रसिद्ध मनीषी सर्वपल्ली राधाकृष्णन (Dr. Sarvepalli Radhakrishnanका मानना है कि उनकी आत्मकथा, जिसमें आत्मकरुणा या नैतिक श्रेष्ठता को जरा भी प्रमाणित करने की चेष्टा किए बिना उनके जीवन और संघर्ष की कहानी वर्णित की गयी है, जो हमारे युग की सबसे अधिक उल्लेखनीय पुस्तकों में से एक है। 

प्रकाशित पुस्तकें-

  • पिता के पत्र : पुत्री के नाम – 1929
  • विश्व इतिहास की झलक (Glimpses of World History) – 1933
  • मेरी कहानी (An Autobiography ) – 1936
  • भारत की खोज/हिन्दुस्तान की कहानी (The Discovery Of India) – 1945
  • राजनीति से दूर (Rajniti Se Door)
  • इतिहास के महापुरुष
  • राष्ट्रपिता (Rashtrapita)
  • जवाहरलाल नेहरू वाङ्मय

नेहरू के किस्से – Untold Story of Pandit Jawaharlal Nehru

  1. बीबीसी ने नेहरू से जुड़े कई किस्से साझा किया है। इसके अनुसार विभाजन के बाद सीमा के दोनों ओर इंसान, इंसान के ख़ून का प्यासा हो गया था। चाहे लाहौर हो या कोई और जगह, हत्या और लूट का तांडव मचा हुआ था। जवाहरलाल नेहरू को अचानक ख़बर मिली कि दिल्ली के कनॉट प्लेस में मुसलमानों की दुकानें लूटी जा रही हैं। जब नेहरू वहाँ पहुंचे तो उन्होंने देखा कि पुलिस तो खड़ी तमाशा देख रही है और हिंदू और सिख दंगाई मुसलमानों की दुकान से औरतों के हैंडबैग, कॉस्मेटिक्स और मफ़लर ले कर भाग रहे हैं। नेहरू को इतना गुस्सा या कि उन्होंने पास खड़े एक सुस्त पुलिस वाले के हाथों से लाठी छीन कर दंगाइयों को दौड़ा लिया।
  2. पूर्व आईसीएस अधिकारी और कई देशों में भारत के राजदूत रहे बदरुद्दीन तैयबजी अपनी आत्मकथा ‘मेमॉयर्स ऑफ़ एन ईगोइस्ट’ (Memoirs of an Egotist) में लिखते हैं, एक रात मैंने नेहरू के घर पहुंच कर उन्हें बताया कि पुरानी दिल्ली से शरणार्थी शिविर पहुंचने की कोशिश कर रहे मुसलमानों को मिंटो ब्रिज के आस-पास घेर कर मारा जा रहा है। बदरुद्दीन तैयबजी ने लिखा है, ये सुनते ही नेहरू तमक कर उठे और तेज़ी से सीढ़ियाँ चढ़ते हुए ऊपर चले गए। थोड़ी देर बाद जब वो उतरे तो उनके हाथ में एक पुरानी, धूल से भरी एक रिवॉल्वर थी। दरअसल ये रिवॉल्वर उनके पिता मोतीलाल की थी, जिससे सालों से कोई गोली नहीं चलाई गई थी। तैयबजी लिखते हैं, ‘उन्होंने मुझसे कहा कि हम लोग गंदे और पुराने कुर्ते पहन कर रात को मिंटो ब्रिज चलेंगे. हम ये दिखाएंगे कि हम भी भाग रहे मुसलमान हैं। अगर कोई हम पर हमला करने की कोशिश करेगा तो हम उसे गोली से उड़ा देंगे। मैं नेहरू की ये बात सुन कर हक्काबक्का रह गया। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश के प्रधानमंत्री को ये समझाने में मुझे एड़ी चोटी का ज़ोर लगाना पड़ा कि इस तरह के अपराध से निपटने के और भी बेहतर तरीके हैं।’
  3. आज़ादी से कुछ दिन पहले नेहरू के एक सहयोगी मोहम्मद यूनुस के पास जामिया मिलिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) के प्रधानाध्यापक डॉक्टर ज़ाकिर हुसैन (Zakir Hussain) का रात 11 बजे बहुत घबराहट में फ़ोन आया। बाद में डाक्टर ज़ाकिर हुसैन भारत के तीसरे राष्ट्रपति बने। उस समय यूनुस नेहरू के निवास में ही ठहरे हुए थे। ज़ाकिर हुसैन ने उन्हें बताया कि दंगाइयों की बड़ी भीड़ इस समय कॉलेज के बाहर जमा हो रही है और उन्हें उनके इरादे नेक नहीं लगते।  मोहम्मद यूनुस अपनी किताब ‘पर्सन्स, पैशन्स एण्ड पॉलिटिक्स‘ में लिखते हैं, फ़ोन सुनते ही मैं नेहरू के पास दौड़ता हुआ गया। उस समय भी वो अपने दफ़्तर में काम कर रहे थे। जैसे ही मैंने उन्हें सारी बात बताई, उन्होंने अपनी कार मंगवाई और मुझे भी उसमें बैठने के लिए कहा। कार में उनके साथ कोई गार्ड नहीं था। जब हम जामिया पहुंचे तो हमने वहां देखा कि डरे हुए छात्रों और कर्मचारियों ने भवन के अंदर शरण ले रखी है और उसको हिंसा पर उतारू भीड़ ने घेर रखा है। मोहम्मद यूनुस आगे लिखते हैं, जैसे ही नेहरू वहाँ पहुंचे, भीड़ ने उन्हें पहचान कर उन्हें घेर लिया। नेहरू ने बिना वक्त गंवाए उन पर उनके व्यवहार के लिए चिल्लाना शुरू कर दिया। कुछ ही मिनटों में उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया और वो नेहरू से माफ़ी मांगने लगे। नेहरू ने जामिया के प्रांगण में घुस कर ज़ाकिर साहब को ढांढस बंधाया। इस बीच नवनियुक्त वायसराय माउंटबेटन तक ख़बर पहुंच गई कि नेहरू बिना किसी सुरक्षा के नाराज़ भीड़ के सामने चले गए हैं। उन्होंने तुरंत कुछ जीपों में मशीन गन फ़िट करा कर अपने बॉडी गार्ड नेहरू की सुरक्षा के लिए भेज दिए। जब ये लोग वहाँ पहुंचे तो उन्होंने नेहरू को लोगों से घिरा पाया। उससे पहले कि कोई अनहोनी होती, उन्हें नारे सुनाई दिए, “जवाहरलाल नेहरू ज़िंदाबाद!

मृत्यु – Death Of Jawaharlal Nehru

1962 में चीन (India China War 1962) के साथ संघर्ष के कुछ ही समय बाद Jawaharlal Nehru के स्वास्थ्य में गिरावट के लक्षण दिखाई देने लगे। उन्हें 27 मई 1964 में दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह दिया। नेहरू के बारे में सर्वपल्ली राधाकृष्णन  ने कहा था, जवाहर लाल नेहरू हमारी पीढ़ी के एक महानतम व्यक्ति थे। वह एक ऐसे अद्वितीय राजनीतिज्ञ थे, जिनकी मानव-मुक्ति के प्रति सेवाएं चिरस्मरणीय रहेंगी। स्वाधीनता संग्राम के योद्धा के रूप में वह यशस्वी थे और आधुनिक भारत के निर्माण के लिए उनका अंशदान अभूतपूर्व था।

नेहरू के अनमोल विचार

  • सफलता उन्हीं को मिलती है, जो निडर होकर फैसला लेते हैं और परिणामों से नहीं घबराते।
  • अज्ञानता बदलाव से हमेशा डरती है।
  •  महान कार्य और छोटे लोग साथ-साथ नहीं चल सकते।
  •  हकीकत हमेशा हकीकत ही रहेगी और आपके नापसंद करने से गायब नहीं होगी।
  • संकट के समय में छोटी से छोटी चीज का भी महत्व होता है।
  •  नागरिकता देश की सेवा में निहित है।
  •  जो आदमी आपने आपको ज्यादा गुणी दिखाता है, वह सबसे कम गुणी होती है।
  • लोगों की कला उसके उनका दिमाग का सही आईना है।
  • हमारी सबसे बड़ी कमी है कि हम करने की बजाए बातें ज्यादा करते हैं।
  • सुझाव देना और बाद में उसके गलत नतीजे से बचकर निकल जाना सबसे आसान है।
  • संस्कृति मन और आत्मा का विस्तार है।
  • लोकतंत्र अच्छा हैष मैं ऐसा इसलिए कहता हूं क्योंकि अन्य प्रणालियां इससे बदतर हैं।
  • संकट में हर छोटी सी बात का महत्व होता है।
  •  कार्य के प्रभावी होने के लिए उसे स्पष्ट लक्ष्य की तरह निर्देशित किया जाना चाहिए।
  • महान कार्य और छोटे लोग एक साथ नहीं चल सकते हैं।
  •  हमें अपने जीवन में थोड़ा विनम्र रहना चाहिए हमें यह सोचना चाहिए कि शायद सत्य पूर्ण रूप से हमारे साथ नहीं है।
  • हमारे अंदर सबसे बड़ी कमी यह होती है कि हम चीजों के बारे में बात ज्यादा करते हैं और काम कम करते हैं।
  • हर हमलावर देश की यह दावा करने की आदत होती है कि यह कार्य वह अपनी रक्षा के लिए कर रहा है।
  • किसी कार्य को प्रभावी बनाने के लिए उसे स्पष्ट लक्ष्य की तरफ दिशा देनी चाहिए।
  • जो व्यक्ति हमेशा अपने ही गुणों का बखान करता है वो सबसे कम गुणी होता है।
  • हमारी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि हम चीजों के बारे में बातें ज्यादा करते हैं और काम बहुत कम।
  • यदि पूंजीवादी शक्तियों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो वे अमीर को और अमीर और गरीब को और गरीब बना देंगी।
  • किसी को सुझाव देना और बाद में हमने जो कहा उसके नतीजे से बचने की कोशिश करना बेहद आसान है।
  • एक सिद्धांत को वास्तव में संतुलित किया जाना चाहिए।
  • व्यक्ति की कला उसके दिमाग का सही चित्र है।
  • दक्षता का मतलब होता है की हम मौजूद सामग्री का उचित लाभ उठायें।
  • योग्य और वफादार लोग हमेशा महान उद्देश्यों के लिए कार्य करते है,उन्हें भले ही तब पहचान न मिले किन्तु अंत में पहचान मिल ही जाती है।
  • समय वर्ष बीतने से नहीं मापा जाता बल्कि आपने क्या हासिल किया इससे मापा जाता है।

आलोचना – Criticism

काफी ऐसे लोग हैं जिनका मानना है कि जवाहर लाल नेहरू ने अन्य नेताओं की तुलना में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बहुत कम योगदान दिया था। लेकिन फिर भी गांधीजी ने उन्हें ही भारत का पहला प्रधानमंत्री बनने के लिए कहा। नेहरू को महात्मा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में जाना जाता है। गांधी पर यह आरोप भी लगता है कि उन्होंने राजनीति में नेहरू को आगे बढ़ाने का काम सरदार वल्लभ भाई पटेल समेत कई सक्षम नेताओं की कीमत पर किया। जब आजादी के ठीक पहले कांग्रेस अध्यक्ष बनने की बात थी और माना जा रहा था कि जो कांग्रेस अध्यक्ष बनेगा वही आजाद भारत का पहला प्रधानमन्त्री होगा तब भी गांधी ने प्रदेश कांग्रेस समितियों की सिफारिशों को अनदेखा करते हुए नेहरू को ही अध्यक्ष बनाने की दिशा में सफलतापूर्वक प्रयास किया। इससे एक आम धारणा यह बनती है कि नेहरू ने न सिर्फ महात्मा गांधी के विचारों को आगे बढ़ाने का काम किया होगा बल्कि उन्होंने उन कार्यों को भी पूरा करने की दिशा में अपनी पूरी कोशिश की होगी जिन्हें खुद गांधी नहीं पूरा कर पाए। लेकिन सच्चाई इसके उलट है। यह बात कोई और नहीं बल्कि कभी नेहरू के साथ एक टीम के तौर पर काम करने वाले जयप्रकाश नारायण ने 1978 में आई पुस्तक ‘गांधी टूडे’ की भूमिका में कही थी। जेपी ने नेहरू के बारे में कुछ कहा है तो उसकी विश्वसनीयता को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिए क्योंकि नेहरू से जेपी की नजदीकी भी थी और मित्रता भी। लेकिन इसके बावजूद जेपी ने नेहरू मॉडल की कमियों को उजागर किया। ऐसे भी आरोप लगते हैं कि स्वतंत्रता के बाद नेहरू ने 20 वर्षों तक आईबी द्वारा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के सम्बन्धियों की जासूसी करायी।

सारांश

Pandit Jawaharlal Nehru के किए गए काम आज भी मील के पत्थर हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं जिसका फायदा लगातार देश को प्राप्त हो रहा है। हालांकि नेहरू जी को तमाम कारणों से निशाना भी साधा जाता है। जवाहर लाल नेहरू की बोली गई बात आज भी उतनी ही तार्किक है जितना उस वक्त थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों के बीच सेतु का काम किया है। आज भी Jawaharlal Nehru Biography राजनीति के गलियारों से लेकर समाजिक उत्थान के कार्यों में एक पथप्रदर्शक का काम करती है।

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