Lal Bahadur Shastri Biography in Hindi – लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी

Lal Bahadur Shastri Biography in Hindi – लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी

जीवनी

आज हम लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी यानि Lal Bahadur Shastri Biography के बारे में जानेंगे। लाल बहादुर शास्त्री जी का असली नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव था किन्तु उन्होंने शास्त्री की उपाधि लेने के बाद श्रीवास्तव को हटा दिया। उनका जन्म 2 अक्टूबर (October) 1904 को Mughalsarai, Uttar Pradesh में एक कायस्थ परिवार (Kayastha family) में हुआ था। उनके पिता का नाम Sharda Prasad Srivastava तथा माता का नाम Ramdulari था। चूँकि उनके पिता प्राथमिक स्कूल में टीचर थे तो सब लोग उन्हें मुंशी कहकर बुलाया करते थे। बाद में वो राजस्व विभाग में क्लर्क बन गए थे।

लाला बहादुर शास्त्री की जीवनी एक नजर में

पूरा नामलाल बहादुर (श्रीवास्तव) शास्त्री
धर्महिन्दू
जन्म2 अक्टूबर 1904 मुगलसराय, उत्तर प्रदेश
मृत्यु11 जनवरी 1966 (61 वर्ष) ताशकंत (भूतपूर्व सोवियत संघ)
माताराम दुलारी देवी
पिताशारदा प्रसाद श्रीवास्तव
जीवनसाथीललिता शास्त्री (16 मई 1928)
बच्चे2 पुत्रियां (कुसुम और सुमन) एवं
4 पुत्र (हरिकिशन शास्त्री, अनिल शास्त्री, सुनील शास्त्री और अशोक शास्त्री)
शिक्षा स्नातक(Graduation) (1926 काशी विद्यापीठ)
पेशाराजनीति
उपलब्धियांभारत रत्न (1966) मरणोपरांत
राजनीतिक दल कांग्रेस (1921)
राजनीतिक पदप्रधानमंत्री (9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966)
विदेश मंत्री (9 जून 1964 से 18 जुलाई 1964)
गृह मंत्री (4 अप्रैल 1961 से 29 अगस्त 1963)
रेल मंत्री (1951 से 1956)
लाला बहादुर शास्त्री की जीवनी एक नजर में

शास्त्री जी का बचपन – Lal Bahadur Shastri Childhood

शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) जी अपने सभी भाई बहनों में छोटे थे इस नाते सभी उनको ‘नन्हे’ कहकर बुलाते थे। नन्हे शास्त्री जी का बचपन बहुत कठिनाईओं भरा था। वो अठारह महीने के ही थे जब उनके पिता चल बसे। पिता के जाने के बाद उनकी माता उन्हें उनके नाना के घर ले आयी किन्तु कुछ समय बाद उनके नाना जी का भी देहांत हो गया। संकट की घडी में उनके मौसा रघुनाथ प्रसाद ने नन्हे और उनकी दो बड़ी बहनों के लालन पालन में उनकी माता का बहुत सहयोग किया।

प्रारंभिक शिक्षा – Early Education

लाल बहादुर शास्त्री जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ननिहाल (पूर्व मध्य रेलवे इंटर कॉलेज मुगलसराय और वाराणसी) में हासिल की तत्पश्चात वो Graduation की पढ़ाई के लिए काशी विद्यापीठ (Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith) चले आये। यहां उन्होंने 1926 में स्नातक (Graduation) की डिग्री हासिल की और यहीं उन्हें ‘शास्त्री’ अर्थात ‘विद्वान’ की उपाधि से भी नवाज़ा गया। शास्त्री बनने के बाद लाल बहादुर श्रीवास्तव ने अपने नाम से श्रीवास्तव हटा दिया। वो इसे जातिसूचक शब्द मानते थे। इसके बाद लोग उन्हें लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) बुलाने लगे।  

स्वाधीनता संग्राम – Freedom Movement

शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) जी के परिवार का दूर दूर तक freedom struggle से कोई लेना देना न था लेकिन फिर भी लाल बहादुर में स्वाधीनता की ललक पैदा हो गयी। इसका श्रेय वो अपने टीचर निष्कामेश्वर प्रसाद मिश्रा को देते हैं जिन्होंने शास्त्री जी की आर्थिक रूप से भी बहुत मदद की थी। मिश्रा जी ने शास्त्री जी को अपने बच्चों को ट्यूशन देने के लिए कहा था ताकि शास्त्री जी की मदद हो सक। मिश्रा जी से प्रेरित होकर शास्त्री जी ने स्वन्त्रन्ता संग्राम के बारे में पढ़ना शुरू कर दिया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda)एनी बेसेंट (Annie Besant) और महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) के बारे में पढ़ा और एक दिन महात्मा गाँधी और मदन मोहन मालवीय (Madan Mohan Malaviya) की जनसभा में शामिल होने के लिए चले गए।

क्रांतिकारी शास्त्री जी – Freedom Fighter Lal Bahadur Sashtri

शास्त्री जी उन दिनों 10वीं कक्षा में पढ़ा करते थे और उनके इम्तिहान सिर्फ तीन महीने दूर थे जब जनवरी (January) 1921 में बनारस (Varanasi) में वो जनसभा हुई जिसमें Lal Bahadur Shastri जी ने भी भाग लिया। जनसभा में गाँधी (Mahatma Gandhi) जी ने छात्रों को असहयोग आंदोलन (non-cooperation movement) में हिस्सा लेने को प्रेरित किया। बस फिर क्या था शास्त्री जी ने अगले ही दिन हरीश चंद्र हाई स्कूल से अपना नाम कटवा लिया और कांग्रेस पार्टी (Congress Party) का हिस्सा बन गए।

कांग्रेस कार्यकर्ता – Congress Worker

1928 के आते आते शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) जी कांग्रेस के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता बन गए थे। उसी वर्ष उन्हें ढाई वर्ष का कारावास भी झेलना पडा। उसके बाद उन्होंने 1937 में उत्तर प्रदेश के Parliamentary Board के Organizing Secretary के रूप में भी कार्य किया। 1940 में उन्हें फिर से एक वर्ष के लिए जेल जाना पडा। इस बार उन्हें सत्याग्रह आंदोलन (Satyagraha movement) के समर्थन के लिए कारावास भेजा गया। 8 अगस्त को शास्त्री जी बस जेल से बाहर आये ही थे कि गाँधी जी ने Quit India का नारा दे दिया। उस समय शास्त्री जी बम्बई (Mumbai) में थे। लेकिन नारा मिलने की देर थी कि शास्त्री जी बिना अपनी परवाह किये हुए इलाहाबाद (Allahabad) को चल पड़े। इलाहाबाद में करीब एक सप्ताह तक शास्त्री जी ने जवारलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) जी के आवास आनंद भवन से स्वतंत्रता संग्राम (freedom struggle) के कार्यकर्ताओं को दिशा निर्देश दिए। बाद में वो 1936 से 1946 तक United Province के निर्वाचित प्रतिनिधि रहे।

राजनीतिक जीवन – Political Life of Lal Bahadur Shastri

Independent India में लाल बहादुर शास्त्री जी को उनके Home State उत्तर प्रदेश का Parliamentary Secretary बनाया गया। इसके बाद शास्त्री जी ने Govind Ballabh Pant के मुख्यमंत्री (chief minister) काल में उत्तर प्रदेश के पुलिस और परिवहन मंत्री (Police and Transport Minister) बने। परिवहन मंत्री रहते हुए ही शास्त्री जी ने पहली बार महिला कंडक्टरों की नियुक्ति की। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस को जनता पर लाठी के जगह पानी की बौछार का इस्तेमाल करने का आदेश दिया। उनके पुलिस मंत्री रहते हुए ही 1947 के दंगों (riots) को शांत किया जा सका। और उन्होंने ही mass migration और refugee resettlement का सफलतापूर्वक संचालन किया।

वर्ष 1951 में Lal Bahadur Shastri जी को All India Congress Committee का General Secretary बनाया गया। उस समय Prime Minister, Jawaharlal Nehru थे। महासचिव बनाने के साथ ही उनको चुनाव के लिए candidates ढूंढ़ने और चुनावी गतिविधियों जैसे प्रचार को दिशा देने की भी जिम्मेदारी दी गयी। उनके कुशल नेतृत्व में कांग्रेस (Congree) ने 1952, 1957 और 1962 के general election में भारी बहुमत से जीत हासिल की। 1952 में शास्त्री जी स्वयं उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। उन्होंने Soraon North क्षेत्र से 69 % vote से जीत हासिल की। उनकी इस जीत के बाद उम्मीद की जा रही थी की शास्त्री जी उत्तर प्रदेश के गृह मंत्री बनेंगे किन्तु Prime Minister Jawaharlal Nehru ने उन्हें दिल्ली बुला लिया जहां उन्हें स्वतंत्र भारत (Independent India) की पहली कैबिनेट में रेलवे और परिवहन मंत्री बनाया गया। 1959 में शास्त्री जी ने Commerce and Industries Ministry का कार्यभार संभाला और 1961 में वो देश के गृह मंत्री (Home Minister) बने। 1964 में शास्त्री जी ने Mangalore Port की नीव रखी। उस समय वो बिना विभाग के मंत्री (minister without portfolio)थे।

प्रधानमंत्री पद – Lal Bahadur Shastri as Prime Minister’s Post

27 मई (May) 1964 को जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) की असमय मृत्यु के बाद लाल बहादुल शास्त्री जी को Prime Minister पद की जिम्मेदारी दी गयी। कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के उस समय के अध्यक्ष K Kamaraj ने 9 जून को मृदुभाषी और नेहरू के विचारों पर चलने वाले शास्त्री जी को प्रंधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव पेश किया जिसे सर्वसम्मति से मान भी लिया गया। राष्ट्र को अपने पहले सम्बोधन में शास्त्री जी ने कहा था कि ‘हर राष्ट्र के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब वो स्वयं को इतिहास के दोराहे पर खड़ा पाटा है लेकिन वो नहीं जानता की किस और जाना है। किन्तु हमें दोराहे पर नहीं खड़ा होना है क्यूंकि हमारा रास्ता सीधा तरक्की की और जाता है। हमें एक समाजवादी लोकतंत्र की स्थापना करनी है जिसमें सबके लिए सामान विकास के अवसर हों। उन्होंने विश्व शांति का सन्देश भी दिया’।

1965 का भारत पाक युद्ध – 1965 Indo-Pak War

1965 के भारत पाक युद्ध यानि Indo-Pak war के दौरान उनका दिया हुआ “जय जवान जय किसान (Jai Jawan Jai Kisan) का नारा आज भी देशवासियों की रगों में जोश भर देता है। इस जंग में पाकिस्तान (Pakistan) को करारी शिकस्त कहानी पड़ी। कश्मीर में हाजी पीर (Haji Pir, in Kashmir) उसके हाथ से चला गया और उसका लाहौर (Lahore) शहर भारतीय तोपखाने की रेंज में आ गया। 1 अगस्त (August) 1965 को शुरू हुई ये जंग (war) 23 सितम्बर (September) 1965 को पाकिस्तान (Pakistan) की हार और संयुक्त राष्ट्र (UN) के हस्तक्षेप के बाद ही ख़त्म हुई।

ताशकंत संधि और शास्त्री जी की मृत्यु – Tashkent Treaty and Death of Lal Bahadur Shastri

11 जनवरी (January) 1966 को ताशकंत (भूतपूर्व सोवियत संघ) (Tashkent, Uzbekistan (then Soviet Union) में शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) जी का असमय देहांत हो गया। वो भारत पाक शांति संधि पर हस्ताक्षर करने ताशकंत गए थे। और संधि समझते पर हस्ताक्षर करने के एक दिन पश्चात् ही उनका देहांत हो गया। उस समय उनकी उम्र केवल 61 वर्ष (years) थी। हालाँकि उनके देहांत का कारण दिल का दौरा बताया गया , किन्तु उनका परिवार इससे संतुष्ट नहीं था। 1966 में लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) जी को मरणोपरांत भारत रत्न (posthumous Bharat Ratna) की उपाधी से सम्मानित किया गया।

पारिवारिक जीवन – Family Life

लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shashtri) जी का विवाह 16 मई (May) 1928 को ललिता देवी (Lalita Devi) के साथ हुआ था। उनकी 6 संतानें थीं जिसमें दो पुत्रियां – कुसुम (Kusum) शास्त्री एवं सुमन (Suman) शास्त्री तथा चार पुत्र – हरिकिशन शास्त्री (Harikishan Shastri)अनिल शास्त्री (Anil Sashtri)सुनील शास्त्री (Sunil Sashtri) और अशोक शास्त्री (Ashok Sashtri)। उनके पुत्रों में से अनिल और सुनील अभी हैं। अनिल शास्त्री कांग्रेस का हिस्सा हैं जबकि सुनील भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janta Party) के हिस्से हो गए हैं।

लाल बहादुर शास्त्री के बारे में कुछ रोचक बातें – Interesting Facts About Lal Bahadur Sashtri

  •  शास्त्री जी का जन्मदिन 2 अक्टूबर को आता है जिस दिन महात्मा गांधी का भी जन्मदिन होता है।
  • शास्त्री जी का स्कूल गंगा पार था किन्तु नाव में जाने के लिए पर्याप्त पैसे न होने के कारण उन्हें तैर कर जाना पड़ता था और वे दिन में दो बार तैर कर नदी पार करते थे। इस दौरान वे अपनी कॉपी और किताबों को भीगने से बचने के लिए सर पर बाँध देते थे।
  • शास्त्री जी ने केवल 17 वर्ष के आयु में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया जिसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा लेकिन नाबालिग होने के कारण उन्हें छोड़ दिया गया।
  • शास्त्री जी ने नमक सत्याग्रह (salt satyagraha) में भाग लिए और जेल भी गए।
  • भारत के गृह मंत्री होने के नाते उन्होंने सबसे पहले भ्रष्टाचार निरोधक समिति (anti-corruption committee) की शुरुआत भी की।
  • शास्त्री जी ने खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हरित क्रांति (green revolution) का समर्थन भी किया।
  • शास्त्री जी ने दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए श्वेत क्रांति (white revolution) का समर्थन किया और उन्हीं के कार्यों के अनुरूप राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (National Dairy Development Board) बनाया गया। उन्होंने गुजरात के आनंद में स्थित अमूल (Amul) दूध सहकारी का भी समर्थन किया।
  • शास्त्री जी ने स्वयं दहेज़ में केवल कड़ी का कपडा और चरखा स्वीकार किया और दहेज़ प्रथा के खिलाफ आवाज उठायी।
  • शास्त्री जी ने भारत का प्रंधानमंत्री (Prime Minister of India)होने के बावजूद भी कभी कार नहीं रखी।

स्मृति चिन्ह – Lal Bahadur Shastri Memorial

लाल बहादुर जी की स्मृति में दिल्ली में एक शहीद स्मारक “विजय घाट” (Vijay Ghat) पर बनाया गया। इसके अतिरिक्त 1959 में मसूरी उत्तराखंड में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration) की स्थापना की गयी। इसी तरह कुछ और प्रशिक्षण संस्थान खोले गए जैसे कि Lal Bahadur Shastri Educational Trust ने 1955 में दिल्ली में Lal Bahadur Shastri Institute of Management की शुरुआत की। शास्त्री जी द्वारा भारत (India) और कनाडा (Canada) के बीच शैक्षणिक आदान प्रदान की पहल को ध्यान में रखते हुए Indo-Canadian Institute का नाम बदलकर Shastri Indo-Canadian Institute रखा गया। IIT Kharagpur में एक आवास क्षेत्र (residential hall) का नाम शास्त्री जी के नाम पर Lal Bahadur Shastri Hall of Residence कर दिया गया।

2011 में शास्त्री जी की 45वीं पुण्यतिथि (death anniversary) के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने रामनगर, वाराणसी में उनके पैतृक आवास को उनके जीवनी संग्रहालय में परिवर्तित करने का निश्चय किया। इसके साथ Varanasi International Airport का नाम भी शास्त्री जी के नाम पर कर दिया गया। इसके अतिरिक्त देश भर में शास्त्री जी के नाम पर स्टेडियम खोले गए हैं और उनकी मूर्तियों की स्थापना कि गयी है।

शास्त्री जी की जन्मशती (birth centenary) के अवसर पर भारतीय रिज़र्व बैंक (The Reserve Bank of Inaia) ने उनकी स्मृति में एक 5 रूपये का सिक्का जारी किया था। उनकी याद में हर वर्ष Lal Bahadur Shastri Hockey Tournament का आयोजन किया जाता है। 2 अक्टूबर 1993 को संसद के गर्भगृह (central hall of parliament) में शास्त्री जी के आदमकद चित्र (portrait) का अनावरण किया गया। चित्रकार विद्या भूषण द्वारा बनाये गए इस चित्र का अनावरण उस समय के राष्ट्रपति डॉ शंकर दयाल शर्मा (President Dr. Shankar Dayal Sharma) ने किया था। ताशकंत, उज्बेकिस्तान (Tashkent, Uzbekistan) में जहां शास्त्री जी की मृत्यु हुई वहाँ Lal Bahadur Shastri Center for India Culture की स्थापना हुई और शास्त्री जी की मूर्ति के साथ एक सड़क का नाम शास्त्री जी के नाम पर कर दिया गया।

सारांश

लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) जी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे लेकिन उनका कार्यकाल अद्वितीय रहा। उन्हें भारत में हरित क्रांति (green revolution) का जनक भी कहा जा सकता है। वे श्वेत क्रांति (white revolution) के भी समर्थक थे। लेकिन उन्हें उनके जय जवान जय किसान नारे के लिए ज्यादा जाना जाता है। उनका जीवन सादगी भरा था किन्तु उनके विचार क्रन्तिकारी थे। ये शास्त्री जी ही थे जिन्होंने पुलिस को भीड़ को तीतर बितर करने के लिए लाठियां भांजने के बजाये water-jet का इस्तेमाल करने को कहा और उन्होंने ही भ्रस्टाचार निरोधक विभाग की शुरुआत की। और 1965 के भारत पाक युद्ध (Indo-Pak war) में लाल बहादुर शास्त्री जी के हौंसले ने ही पाकिस्तान (Pakistan) को धुल चटाई थी। शास्त्री जी सच में ही भारत के लाल थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *