Purushottam Ekadashi 2020 – पुरुषोत्तमी एकादशी

Purushottam Ekadashi 2020 – पुरुषोत्तमी एकादशी

धर्म

पुरुषोत्तम एकदशी (Purushottam Ekadashi) को परमा एकादशी (Parma Ekadasi) या हरिवल्लभ एकादशी (Harivallabh Ekadasi) के नाम से भी जाना जाता है। जिस चंद्र मास में सूर्यसंक्रान्ति नहीं होती है वे मास पुरुषोत्तम मास कहलाते हैं। इस मास को मलमास या अधिक मास कहते हैं। अधिकमास या मलमास में 2 एकादशी पड़ते है इसमें पड़ने वाली दोनों एकादशी को पुरुषोत्तम एकादशी कहा जाता है। पहला शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्ण पक्ष का। ठीक इसी प्रकार अधिकमास यानि पुरुषोत्तम मास में भी दो एकादशी अति है। इसी एकादसी को पुरुषोत्तम एकादशी कहा जाता है।  

पुरुषोत्तमी एकादशी क्या होता है – What is Purushottam Ekadashi

पंचांग के अनुसार पुरुषोत्तम मास में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पुरुषोत्तम एकादशी कहते हैं और इसी दिन व्रत रखा जाता है। इसे अधिकमास Ekadashi, परमा एकादशी या हरिवल्लभ Ekadashi या पद्मिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। जैसे की हम जानते है की हर मास में एकादशी दो बार पड़ती है , ठीक उसी प्रकार पुरुषोत्तम एकादशी भी दो बार पड़ती है। यह एकादशी प्रत्येक तीसरे वर्ष के पुरुषोत्तम मास में एक बार आता है।

पुरुषोत्तमी एकादशी क्यों मनाया जाता है

 श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार Mahabharata काल में स्वंय भगवान श्रीकृष्ण ने अधिकमास में पुरुषोत्तमी एकादशी व्रत का महत्व युधिष्ठिर और अर्जुन को बताया था। तभी से इस एकादशी को मनाया जाता है। पुराणों में कहा गया है कि Purushottam Ekadashi का व्रत अगर आप करते हैं तो इससे सभी तीर्थों और यज्ञों का फल प्राप्त होता है, साथ ही पापों से भी मुक्ति मिलती है। ख़ास तौर से गंभीर रोगों से रक्षा होती है और खूब सारा नाम यश मिलता है। जैसे तीर्थों में गंगा श्रेष्ठ है वैसे व्रतों में Purushottam Ekadashi का व्रत श्रेष्ठ होता है। 

Purushottam Ekadashi का महत्त्व

ब्रह्मांड पुराण में कहा गया है कि मलमास की एकादशी पर उपवास और भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ ही नियम और संयम से रहने पर भगवान विष्णु खुश होते हैं। अन्य पुराणों में कहा गया है कि इस व्रत से बढ़कर कोई यज्ञ, तप या दान नहीं है। इस एकादशी का व्रत करने वाले मनुष्य को सभी तीर्थों और यज्ञों का फल मिल जाता है। जो मनुष्य इस एकादशी पर Bhagvan Vishnu या श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत करता है, उसके जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप धुल जाते हैं। ऐसा इंसान हर तरह के सुख भोगकर Bhagvan Vishnu के धाम को प्राप्त करता है।

पुरुषोत्तमी एकादशी पूजन विधि

Purushottam Ekadasi के पूर्व की रात्रि दशमी तिथि की होती है, इस रात्रि में पुरुषोत्तम एकादशी का व्रत शुरू किया जाता है। यह व्रत 24 घंटे का होता है और इस दौरान सात्विक भोजन का उपयोग करना चाहिए। Ekadashi के दिन सूर्य उदय से पूर्व स्नान करने के बाद Bhagvan Vishnu का ध्यान व प्रार्थना करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए और Vishnu पुराण का पाठ करना चाहिए। सबसे पहले भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को पीला कपड़ा बिछाकर स्थापित करें और उन पर गंगाजल के छीटें दें और रोल-अक्षत का तिलक लगाएं और सफेद फूल चढ़ाएं। इस दिन सफेद फूल चढ़ाने का विशेष महत्व माना जाता है। इसके बाद भगवान को भोग लगाएं और तुलसी का पत्ता भी अर्पित करें। इसके बाद भगवान के मंत्रों का जप करें और फिर उनकी आरती उतारें।     

पुरुषोत्तमी एकादशी व्रत कथा

प्राचीन काल में महिष्मती नगरी में कृतवीर्य (Kritvirya) नामक राजा राज्य करते थे। उनकी अनेक रानियां थीं। उन्होंने अनेक व्रत-उपवास और यज्ञ किए, पर कोई लाभ न हुआ। इससे दुखी हो राजा वन में जाकर तपस्या करने लगे । दस हजार वर्ष तप करते हुए बीत गए, परंतु भगवान प्रसन्न न हुए।

तब एक दिन उनकी एक रानी प्रमदा (Pramada) ने अत्रि (Atri) की पत्नी महासती अनुसूयाजी (Mahasati Anusuji) की सेवा कर उनसे पुत्र प्राप्ति का उपाय पूछा। उन्होंने उसे पद्मिनी एकादशी का विधान से व्रत करने को कहा। इसे करने से भगवान रानी के सामने प्रकट हुए और उन्हें प्रसन्न होकर वरदान दिया कि “तुझे ऐसा पुत्र मिलेगा जिसे हर जगह जीत मिलेगी“। इस व्रत के प्रभाव से उनके घर में एक पुत्र हुआ, जिसने तीनों लोकों के विजेता रावण को हराकर बंदी बना लिया तथा उसे बांधकर अपनी घुड़साल के स्थान पर रखा और घर में रावण के दस मस्तकों पर दस दीपक जलाकर उसे खड़ा रखा।उस महाबली को ही सहस्त्रार्जुन (Sahastrajun) कहा जाता है।

Purushottam Ekadashi 2020 Date and Muhurat

अभी चल रहे मलमास के महीने में दो एकादशी पड़ेंगे पहली एकादशी 27 सितंबर रविवार को पड़ रही है, जिसे पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। पद्मिनी एकादशी तिथि का प्रारंभ 26 सितंबर 2020, शनिवार को 06:59 मिनट से शुरू होकर 27 सितंबर 2020, रविवार को 07.46 मिनट पर Ekadashi तिथि समाप्त होगी। एकादशी पारण मुहूर्त का समय 06.10 मिनट से 08.26 मिनट तक रहेगा। दूसरी एकादशी 13 अक्टूबर मंगलवार को पड़ेगी, जिसे परम एकादशी के नाम से जाना जाता है। आपको बता दें जो व्यक्ति इन दिन व्रत रखेगा उसे दस एकादशी का फल मिलेगा। इस दिन व्रत करने से कई यज्ञ करने के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है।

सारांश

मलमास महीने में Ekadashi का व्रत करने पर मनुष्य कीर्ति प्राप्त करके बैकुंठ को जाता है, जो मनुष्यों के लिए भी दुर्लभ है। Ekadashi के दिन इस विधि-विधान से पूजन कर मनुष्य मोक्ष को प्राप्त कर सकता है।

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