Vijayadashami - विजयादशमी क्यों मनाई जाती है

Vijayadashami – विजयादशमी क्यों मनाई जाती है

फेस्टिवल

भारत त्योहारों का देश है। यहाँ सालभर किसी न किसी धर्म और संप्रदाय के त्योहार बहुत धूमधाम और जोश के साथ मनाए जाते हैं। त्योहार हमें ख़ुशियाँ बाँटने और मिलनेजुलने का एक मौक़ा तो देते ही है साथ ही साथ कोई न कोई अच्छी शिक्षा भी देते हैं। विजयादशमी (Vijayadashami) ऐसा ही एक त्योहार है जो धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक है। यह त्योहार हमें सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। हम देखते हैं कि किस तरह अहंकार, लोभ और मोह से घिरे हुए महिषासुर और रावण जैसे दुराचारी अत्यंत बलवान होते हुए भी एक दिन अवश्य अपने अंत को प्राप्त होते हैं।

विजयादशमी क्या है – What is Vijayadashami

विजयादशमी (Vijayadashami) हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है।विजयादशमी को दशहरा (Dussehra), दसरा, बिजोया (Bijoya), आयुध पूजा (Ayudh Pooja) नामों से भी जाना जाता है। दशहरा नवरात्र के पावन पर्व का अंतिम दिन होता है। नवरात्र के आरंभ से ही जगह-जगह रामलीला का मंचन होने लगता है, मेले लगते हैं; बच्चे मेलों से तलवार, धनुष, गदा, खिलौने, मिठाइयाँ खरीदते हैं। दसवें दिन बुराई के प्रतीक के रूप में रावण (Ravan), मेघनाद (Meghnad) और कुंभकर्ण (Kumbhkaran) के पुतले जलाए जाते हैं।आइए आपको कुछ रोचक बातें बताते हैं।

विजयादशमी का इतिहास – History of Vijayadashami/ Dussehra

एक समय महिषासुर (Mahishasur) नामक दैत्य का बहुत प्रकोप था। उसे यह वरदान प्राप्त था कि कोई पुरूष उसे नहीं मार सकता। इस वजह से देवासुर संग्राम में जब देवताओं की पराजय होने लगी तो सब देवों ने अपनी शक्ति एकत्र की जिससे देवी दुर्गा का अवतरण हुआ।देवी दुर्गा ने नौ दिन तक चले युद्ध के बाद महिषासुर का संहार किया था। और देवी को महिषासुर मर्दिनी का नाम मिला।माना जाता है महिषासुर से ही मैसूर शहर का नाम भी पड़ा।

रामायण (Ramayan) के अनुसार रावण छल और बल से देवी सीता का हरण कर लेता है। भगवान राम अत्याचार और अन्याय का प्रतीक बन चुके रावण को इसी दिन वध करते हैं और अजेय कही जाने वाली लंका (Lanka जिसे अब Sri Lanka के नाम से भी जाना जाता है) को जीतकर अपनी पत्नी सीता को मुक्त करवाते हैं।

महाभारत (Mahabharat) में वर्णन है अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने अपने सारे शस्त्र शमी के पेड़ में छिपा दिए थे और विजयादशमी के दिन ही उन्हें वापस निकाल उनकी पूजा की थी। इसलिए क्षत्रिय इस दिन अपने शस्त्रों की पूजा करते हैं।

एक अन्य मान्यता के अनुसार ऋषि वरतंतु (Rishi Varatantu) के शिष्य कौत्स (Kauts) गुरुदक्षिणा में धन देने के लिए राजा रघु (Raja Raghu) से सहायता माँगते हैं। लेकिन उस समय रघु का कोष ख़ाली हो चुका होता है। अब राजा रघु, इन्द्र देवता (God of Rain) के पास जाते हैं और देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर (Kuber) को आदेश देते हैं की रघु के राज्य में स्वर्ण वर्षा की जाए। कुबेर दशहरे के दिन शमी के पत्तों के माध्यम से सोने के सिक्कों की वर्षा करते हैं। इसलिए शमी के पत्तों को सोन पत्ती या सोना भी कहा जाता है।

विजयादशमी क्यों मनाई जाती है

अन्य भारतीय त्योहारों की तरह दशहरे से भी कई पौराणिक मान्यताऐं जुड़ी हुई हैं। भारत के पूर्वी भाग में यह माँ शक्ति की उपासना का पर्व है। उत्तर और मध्य भाग में इसे श्रीराम की रावण पर विजय और रावण के अंत के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

विजयादशमी का महत्व – Importance of Vijayadashami

दस सिरों वाले रावण की पराजय के कारण इस पर्व काे विजयादशमी या दशहरा (Vijayadashami – Dussehra) कहा गया। यह सत्य की असत्य पर, ज्ञान की अज्ञान पर और अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग शस्त्रों की पूजा करते हैं और शौर्य की कामना करते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस दिन प्रारंभ किए गए कार्य में सफलता अवश्य मिलती है। दशहरे की तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन शमी का पौधा लगाना और नीलकंठ पक्षी का दर्शन करना लाभकारी माना जाता है। लोग एक-दूसरे को शमी के पत्ते देकर उनकी समृद्धि की कामना करते हैं। दशहरे से ही सर्दियों की शुरूआत होती है और खरीफ की फसल काटी जाती है।

विजयादशमी– Regional celebrations

भारत के अलग-अलग प्रांतों में दशहरा (Dussehra) मनाने के अलग-अलग तरीक़े हैं।

मैसूर (Mysore)

मैसूर (Mysore) का दशहरा (Dussehra) बहुत भव्य होता है। पूरा शहर रोशनी से नहा उठता है।विश्व प्रसिद्ध मैसूर राजमहल आम नागरिकों के लिए खोल दिया जाता है। हाथियों को सजाकर जुलूस निकाला जाता है। जिसे जम्बू सवारी कहा जाता है। कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। पतंग उत्सव (Kite Festival) भी मनाया जाता है और कई तरह की पतंगें उड़ाई जाती हैं। मैसूर के इस भव्य आयोजन का साक्षी बनने के लिए देश विदेश से हज़ारों की तादाद में लोग आते हैं और एक विहंगम दृश्य को अपनी आँखों में सदा के लिए समेटकर ले जाते हैं। यहाँ दशहरे का इतना महत्व है कि इसे कर्नाटक के राज्योत्सव का दर्जा प्राप्त है।

बस्तर (Bastar)

बस्तर का दशहरा (Dussehra) ऐतिहासिक, स्थानीय और पौराणिक मान्यताओं का एक अद्भुत मेल है। बस्तरवासी इस पर्व को अपनी आराध्य दंतेश्वरी माता (Dantesawari Mata) का पर्व मानते हैं। बस्तर (Bastar) के तत्कालीन राजा पुरुषोत्तम देव (Purushottam Dev) के शासनकाल में इस परंपरा की शुरुआत हुई। 75 दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत पाठ जात्रा नामक आयोजन से होती है। इस दिन जंगल से लकड़ी काटकर लाई जाती है जिसका इस्तेमाल रथ बनाने में किया जाता है। बस्तर के दशहरे के बारे में वैसे तो बहुत सी रोचक बातें हैं लेकिन सबसे ख़ास बात यह है की इस दशहरे में शामिल होने के लिए ग्राम देवी-देवताओं को भी न्यौता भेजा जाता है। बस्तर अनेक जनजातियों का गढ़ है। हर रस्म में सभी मतों के लोग मिलजुलकर भाग लेते हैं और सामाजिक समानता का संदेश बाँटते हैं इसलिए विजयादशमी बस्तरवासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

कुल्लू (Kullu)

कुल्लू (Kullu) में दशमी से ही उत्सव की शुरूआत होती है।नगरवासी नए वस्त्र पहनकर, वाद्य यंत्र बजाते हुए जुलूस निकालते हैं। स्थानीय देवी-देवताओं की मूर्तियों को सजाकर पालकी में बिठाया जाता है और नगर परिक्रमा की जाती है।उत्सव के आख़िरी दिन लोग लकड़ियाँ इकट्ठा करते हैं और जला देते हैं। यह लंका दहन का प्रतीक माना जाता है।

असम, बंगाल और ओड़ीशा (Assam, Bengal, and Odisha)

इन प्रांतों में यह त्यौहार देवी दुर्गा को समर्पित है। इसे बंगाल में 5 दिन, उड़ीसा और असम में 4 दिन तक मनाते हैं। पंडालों में देवी माँ, सरस्वती माता, गणेश एवं कार्तिकेय की मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं।अष्टमी पर महापूजा (mahapooja) होती है। दशमी को स्त्रियाँ देवी माता को सिंदूर अर्पित करती हैं और एक दूसरे को भी सिंदूर लगाती हैं। इसे सिंदूर खेला (sindoor khela) कहा जाता है। इसके बाद प्रतिमाओं का विसर्जन (immersion of idols) होता है और नम आँखों से देवी को विदा किया जाता है। सिल्वर सिटी (silver city) कहे जाने वाले शहर कटक (Cuttack) में मूर्तियों का सोने और चाँदी के आभूषणों से भव्य श्रृंगार किया जाता है।

विदेशों में विजयादशमी – Vijayadashami Celebrations Abroad

विदेशों में रह रहे भारतीय बाक़ी पर्वों की तरह दशहरा भी बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम किये जाते हैं। गरबा (Garba), रास (Raas), गिद्दा (Gidda) जैसे नृत्यों का आयोजन किया जाता है। लोग अपने संबंधियों और मित्रों के घर जाते हैं मिठाई बाँटते हैं और खुशियां मनाते हैं।

दशहरा (Dussehra) भारत के अलावा अन्य कुछ देशों में भी मनाया जाता है।

नेपाल (Nepal)

नेपाल में इसे दशाइन (Dashain) या दशाईं कहते हैं।यह दस दिनों तक चलता है। दशाईं में भैरव देवता, काली माता और दुर्गा माता की पूजा की जाती है। लोग देवी-देवताओं और विभिन्न प्रकार के मुखौटे पहनकर समूह में नाचते-गाते हैं। पशु बलि का भी प्रचलन है।

बांग्लादेश (Bangladesh)

यहाँ दशहरा पाँच दिवसीय आयोजन होता है। मंडप लगाए जाते हैं। ढाका स्थित ढाकेश्वरी मंदिर (Dhakeshwari Mandir) की सज्जा देखने योग्य होती है।

Vijayadashami 2020 in Hindi

किसी त्योहार के आने से कई दिनों पहले ही उसकी तैयारी और इंतज़ार शुरू हो जाता है। Corona की वजह से पिछले कई महीनों से वातावरण में एक उदासी छायी हुई है पर अब लोग उससे लड़ने का साहस जुटाने लगे हैं। दशहरे की तैयारियाँ भी नज़र आ रही है।हालांकि जनसुरक्षा को देखते हुए कई guidelines दी गई हैं। रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। TV पर live प्रसारण भी किया जा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के बाद इस साल दशहरे को लेकर लोगों का उत्साह एक नई बुलंदी पर है।

सारांश

Dussehra मनाने की वजह और तरीके अलग हो सकते हैं पर यह त्योहार विजय का त्योहार है। यह हमें भय का सामना करने और सकारात्मकता से आगे बढ़ने की सीख देता है। उम्मीद करते हैं कि यह त्योहार आप लोगों के जीवन में भी ख़ुशियाँ और समृद्धि लेकर आएगा। रावण दहन के साथ काम, क्रोध, लोभ जैसे विकारों और सामाजिक बुराइयों का भी दहन होगा। आप सभी को दशहरे की अनेक शुभकामनाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *