Vishwakarma Puja – विश्वकर्मा पूजा कब और कैसे मनाया जाता है

Vishwakarma Puja – विश्वकर्मा पूजा कब और कैसे मनाया जाता है

धर्म

आज हम विश्वकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja) कब और कैसे मनाया जाता है इसके बारे में जानेंगे। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा (Baghwaan Vishwakarma) का जन्म अश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा तिथि को हुआ था। इस वजह से 17 सितंबर के दिन ही Vishwakarma Puja करनी चाहिए। Vishwakarma Puja उन सभी लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो ArtistArchitect और Businessmen हैं। Diwali के बाद Govardhan Puja पर भी इनकी पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता कही जाती है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में वृद्धि होती है। धन-धान्य और सुख-समृद्धि की अभिलाषा रखने वालों के लिए Bhagwan Vishwakarma की पूजा करना शुभ और मंगलदायी है। महालया पितृ पक्ष श्राद्ध की समाप्ति और बंगालियों के लिए Durga Puja की आरंभ का संकेत है। आमतौर पर, दुर्गा पूजा के लिए उत्सव महालया के सात दिनों के उपरांत शुरू होता हैं। यह पूजा खासकर देश के पूर्वी प्रदेशों में मनाई जाती है, जैसे असमत्रिपुरावेस्ट बंगालओड़िशाबिहारझारखंड

विश्वकर्मा पूजा क्या होता है – What is Vishwakarma Puja

आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पूरा देश विश्वकर्मा पूजा करता है। कहा जाता है कि इस दिन ही ऋषि विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। इस अवसर पर भगवान vishwakarmaके साथ ही कारखानों और फैक्ट्रियों में औजारों की पूजा की जाती है।

Vishwakarma Puja का महत्त्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा जयंती के दिन फैक्ट्री, शस्त्र, Business आदि की पूजा की जाती है जिससे कि Business और रोजगार में तरक्की हो। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में सभी राजधानियों का निर्माण विश्वकर्मा भगवान ने ही किया था। जिसमें स्वर्ग लोकद्वारिकाहस्तिनापुररावण की लंका भी शामिल है।

विश्वकर्मा पूजा क्यों मनाते हैं

हर साल 17 सितंबर को तकनीकी ज्ञान यानि Technology के रचनाकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाती है। इनको देवताओं के वास्तुशिल्प का जनक भी माना जाता है, इसलिए Art and Craft से जुड़े लोग उनकी जयंती को विधि-विधान से मनाते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा के पूजन-अर्चन किए बिना कोई भी तकनीकी कार्य शुभ नहीं माना जाता।

विश्वकर्मा पूजा कब होता है

हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल Vishwakarma पूजा कन्या संक्रांति को होती है। इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। विश्वकर्मा पूजा देवी शिल्पी और भगवान विश्वकर्मा के प्रति श्रद्धा और आस्था प्रकट करने का दिन है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्कर्मा का जन्म भाद्रकृष्ण पक्ष की संक्रांति तिथि को हुआ था। इस जयंती को लेकर कई मान्यताएं प्रसिद्ध हैं। कुछ लोगों का मानना यह भी है कि भाद्रपद की अंतिम तिथि को विश्वकर्मा पूजा करना बेहद शुभ होता है। ऐसे में सूर्य के पारगमन के मुताबिक ही विश्वकर्मा पूजा के मुहूर्त को तय किया जाता है। यही कारण है कि Vishwakarma Jayanti 17 सितंबर को मनाई जाती है

विश्वकर्मा पूजा शुभ मुहूर्त 2021

ज्योतिषि गणना के अनुसार भाद्रकृष्ण पक्ष की संक्रांति तिथि 17 सितंबर को थी इसलिए साल 2021 में भी 17 सितंबर के दिन ही भगवान विश्वकर्मा का जन्मोत्सव यानी Vishwakarma Puja का आयोजन किया जायेगा।

Vishwakarma Puja की रोचक कथा in Hindi

पौराणिक कथा के अनुसार इस समस्त ब्रह्मांड की रचना भी विश्वकर्मा जी के हाथों से हुई है। ऋग्वेद के 10वें अध्याय के 121वें सूक्त में लिखा है कि विश्वकर्मा जी के द्वारा ही धरती, आकाश और जल की रचना की गई है। विश्वकर्मा पुराण के अनुसार आदि नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्मा जी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की। कहा जाता है कि सभी पौराणिक संरचनाएं, भगवान विश्वकर्मा द्वारा निर्मित हैं। भगवान विश्वकर्मा के जन्म को देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन से माना जाता है। पौराणिक युग के अस्त्र और शस्त्र, भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही निर्मित हैं। वज्र का निर्माण भी उन्होंने ही किया था। भगवान विश्वकर्मा ने ही लंका का निर्माण किया था। भगवान शिव ने माता पार्वती के लिए एक महल का निर्माण करने के बारे में विचार किया। इसकी जिम्मेदारी शिवजी ने भगवान विश्वकर्मा को दी तब भगवान विश्वकर्मा ने सोने के महल को बना दिया। इस महल की पूजा करने के लिए भगवान शिव ने रावण को बुलाया। लेकिन रावण महल को देखकर इतना मंत्रमुग्ध हो गया कि उसने पूजा के बाद दक्षिणा के रूप में महल ही मांग लिया। भगवान शिव ने महल रावण को सौंपकर कैलाश पर्वत चले गए। इसके अलावा भगवान विश्वकर्मा ने पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगर का निर्माण भी किया था। कौरव वंश के हस्तिनापुर और भगवान कृष्ण के द्वारका का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था।

कैसे करें भगवान विश्वकर्मा की पूजा – Vishwakarma Puja की आसान विधि

कन्या संक्रांति के दिन सुबह Factory,Workshop,Office,Shops आदि के स्वामी और उनकी पत्नी स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। उसके बाद पूजा स्थान पर आसन ग्रहण करें। सर्वप्रथम दोनों लोग हाथ में जल लेकर विश्वकर्मा पूजा का संकल्प करें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें। उसके बाद एक कलश में पंचपल्लव, सुपारी, दक्षिणा आदि डालें और उसमें कपड़ा लपेट दें। फिर एक मिट्टी के पात्र में अक्षत् रख लें और उसे कलश के मुंह पर रखें। उस पर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर दें।

अब उनको अक्षत्, पुष्प, धूप, दीप, गंध, मिठाई आदि अर्पित करें।

विश्वकर्मा पूजा के दिन ये काम न करें

विश्वकर्मा पूजा वाले दिन औजारों, मशीन और उपकरणों की पूजा अर्चना करना चाहिए। इससे कभी भी धन की कमी नहीं होती है। आज के दिन औजारों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन यानी मांस-मंदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।

हर विशेष पूजन की तरह आज के दिन भी कुछ बातों का खास ख्याल रखा जाना चाहिए

  • विश्वकर्मा पूजा करने वाले सभी लोगों को इस दिन अपने कारखाने, फैक्ट्री बंद रखनी चाहिए।
  • इस दिन अपनी मशीनों, उपकरणों और औजारों की पूजा करने से घर में बरकत होती है।
  • इस दिन औजारों और मशानों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • इस दिन तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अपने रोजगार में वृद्धि के लिए गरीबों और असहाय लोगों को दान-दक्षिणा जरूर दें।
  • अपने बिजली उपकरणों और गाड़ी की सफाई भी करें।

घर पर भी अवश्य करें Vishwakarma Puja 

घर में जितने भी बिजली के उपकरण हैं या वाहन हैं उन सभी की इस अवसर पर अच्छे से सफाई करनी चाहिए। घर में अगर Spare parts हैं तो उनकी ऑयलिंग और ग्रीसिंग करें। ऐसे समझना चाहिए कि ऐसा करके आप विश्वकर्मा भगवान को स्नान और तिलक कर रहे हैं। इससे आपके उपकरण लंबे समय तक चलेंगे। एक रोचक बात यह भी है कि आज के समय में घर-घर में Spare parts रहते हैं इसलिए भी आज के युग को कलियुग कहा जाता है।

विवाहित लोग अपनी पत्नी के साथ करें विश्वकर्मा पूजा

वैवाहिक जीवन वाले अपनी पत्नी के साथ इस पूजन को करें। हाथ में फूल, चावल लेकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करे। पूजा में दीप, धूप, फूल, गंध, सुपारी, रोली इत्यादि चीजों का प्रयोग करें। हाथ में पुष्प, अक्षत लेकर इस मंत्र का जाप करते हुए – ओम आधार शक्तपे नम: और ओम् कूमयि नम:, ओम् अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम: चारो ओर अक्षत छिड़के और पीली सरसों लेकर चारो दिशाओं को बंद कर दे। दीप जलाये, जल के साथ पुष्प एवं सुपारी लेकर संकल्प करे। शुद्ध भूमि पर अष्टदल कमल बनाकर उस स्थान पर सप्त धान्य रखें और उस पर मिट्टी और तांबे से जल डालें। इसके बाद पंचपल्लव, सप्त मृन्तिका, सुपारी, दक्षिणा कलश में डालकर कपड़े से कलश का आच्छादन करे। अब चावल से भरा पात्र समर्पित कर ऊपर विश्वकर्मा भगवान की मूर्ति स्थापित करें और वरुण देव का आह्वान करें। भगवान विश्वकर्मा को पुष्प अर्पित करें और प्रार्थना करें कि – ‘हे विश्वकर्मा जी, इस मूर्ति में विराजिए और मेरी पूजा स्वीकार कीजिए। इस प्रकार पूजन के बाद विविध प्रकार के औजारों और यंत्रों आदि की पूजा कर हवन यज्ञ करना होता है।

सारांश

विश्वकर्मा पूजा का महत्व हमेशा से रहा है और आज भी लोग इसे अपने जीवन का हिस्सा बना कर रखते हैं। अपने Business में तरक्की से लेकर अपने घरों में सुरक्षा के लिए वे Vishwakarma Puja अवश्य करते हैं। जो सीधे तौर पर विश्वकर्मा पूजा नहीं कर पाता है वे किसी न किसी तौर पर Lord Vishwakarma की पूजा में अवश्य सम्मिलित होते हैं। विश्वकर्मा पूजा पर आधारित इस Article से हमने सभी प्रकार की Information आप तक पहुंचाने की कोशिश की है। अगर यह Article आपको अच्छा लगा या आप कोई सुझाव देना चाहते हैं तो Comment अवश्य करें। साथ ही विश्वकर्मा पूजा के महत्व को अधिक से अधिक लोगों तक पहुचाने के लिए इसे Social Media पर भी अवश्य Share करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *